किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए सात ब्लॉकों में 22 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर का होगा और इसमें 125 किसान शामिल होंगे। इस प्रयास से आने वाले दिनों में किसानों को प्राकृतिक तौर पर उन्नत खेती का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
किसानों को प्राकृतिक विधि से खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सात ब्लॉकों में 22 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर का है, इसमें कम से कम 125 किसान होंगे। कम लागत में अधिक उत्पादन दिलाकर किसानों को समृद्ध बनाने के लिए सरकार हर कदम उठा रही है। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत जिले के किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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कृषि विभाग की तरफ से इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। विकास खंड सठियांव, अजमतगढ़, अहरौला, हरैया, अतरौलिया, महाराजगंज और फूलपुर में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए 22 क्लस्टर बनाए गए हैं। हर क्लस्टर 50 हेक्टेयर का बनाया गया है जिसमें कम से कम 125 किसान होंगे। प्राकृतिक खेती में उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं किया जाता है।
बीज, खाद, जैव कीटनाशक को खेत पर ही तैयार किया जाता है। इसमें गो वंश का महत्व होता है। देसी गाय के गोमूत्र से किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, दशपर्णी बनाने की विधि बताई जाएगी। प्राकृतिक खेती से खेत की मिट्टी बीमार नहीं होती और उपज भी बढि़या होता है।
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राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन योजना के तहत सात ब्लॉकों का चयन कर 22 क्लस्टर बनाए गए हैं। क्लस्टर में शामिल किसानों को प्राकृतिक विधि से खेती करने का प्रशिक्षण देने का कार्य शुरू हो चुका है। इससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। -- मुकेश कुमार, उप कृषि निदेशक