आजमगढ़। यदि कहीं जाने के लिए रोडवेज बस का इंतजार कर रहे हैं तो बैठने से पहले इस बात की तस्दीक कर लें कि ये बस परिवहन निगम की ही है। कारण, रोडवेज के नाम पर दिल्ली और लखनऊ समेत अन्य रूटों पर फर्जी रूप से बसों का संचालन हो रहा है। खास बात यह है कि यात्रियों को गुमराह करने के लिए न सिर्फ इनका रूप-रंग सरकारी बसों जैसा किया गया है बल्कि शीशों पर ‘उत्तर प्रदेश परिवार’ या ‘उत्तर प्रदेश परमिट संख्या’ जैसी इबारत भी लिखी हैं।
शहर के नरौली पुल के पास निजी बसों का अड्ढा है। यहां से अन्य जनपदों के लिए निजी बसों का संचालन होता है। हालांकि शासन के आदेश पर कुछ रूटों को छोड़कर दूसरे जनपदों के लिए बसों का संचालन केवल रोडवेज कर रहा है। रोडवेज की सरकारी बसों के अलावा जिले में कुल 34 अनुबंधित बसें भी हैं जिनका संचालन दूसरे जनपदों के लिए होता है। उधर शहर से दिल्ली, प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी व अंबेडकर नगर आदि के लिए दौड़ रही नकली रोडवेज बसें हर महीने लाखों रुपये के सरकारी राजस्व पर डाका डाल रही हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी खामोश हैं। बताया जा रहा है इन बसों का संचालन जिम्मेदारों के इशारे पर ही चल रहा है।
सुरक्षा की नहीं कोई गारंटी
इन बसों में यात्रियों के बैठते ही टिकट बना दिया जाता हैं, जिससे यात्री कुछ दूरी के बाद उतर भी न सकें। इसके बाद ये जहां तहां बसों को रोकते हुए चलते हैं। यदि कोई यात्री विरोध कर दे तो उससे मारपीट तक की जाती है। बसों के चालक भी अनट्रेंड हैं। बीच सड़क पर ही बस को रोककर यात्रियों को बैठाया व उतारा जाता है। सबसे खास बात यह है कि यदि इन नकली बसों में सफर करने पर न तो कोई सुरक्षा है और न सहूलियत।
आरएम अतुल त्रिपाठी ने बताया कि आजमगढ़ रिजनल से कुल 34 अनुबंधित बसें संचालन हो रही है। अनुबंध होने पर रोडवेज द्वारा पेंट किया जाता है और उसपर उत्तर प्रदेश परिवहन लिखा जाता है। अनुबंध निरस्त होने के बाद विभिगा द्वारा कलर बदलवा दिया जाता है। यदि रोडवेज की कलर में कोई बस संचालित होती है तो वह गलत है। आरटीओ द्वारा उक्त बसों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं एआरटीओ संतोष कुमार सिंह ने बताया कि अनुबंध निरस्त होने के बाद भी यदि कोई बस संचालक बस का कलर बिना बदले चल रहा है तो वह गलत है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।