देसी गन का प्रचलन बढ़ा
इन दिनों शहर से लेकर गांव तक देसी गन का प्रचलन है। दीपावली में इसका प्रयोग होता ही है। साथ ही किसान खेत में पशु, पक्षी और नीलगाय भगाने के लिए भी करते हैं। जानकारों के अनुसार, देसी गन से फायरिंग करने के लिए कार्बाइड और एक ढक्कन पानी के अलावा प्लास्टिक की पाइप और गैस लाइटर की जरूरत पड़ती है। बनाने में करीब 150 रुपये खर्च आता है। बाजार में इसे 200 रुपये में बेचा जा रहा है।
प्राथमिकी जांच में यह घटना पूरी तरह इत्तफाकन पाई गई है। किसी भी प्रकार की सुनियोजित घटना और आपराधिक प्रवृत्ति की बात सामने नहीं आई है। घटना की पूरी जांच चल रही है। - मधुबन सिंह, एसपी सिटी।