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53.15 करोड़ के गबन में विभागीय और विधिक कार्रवाई की संतुति

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आजमगढ़। मंडल में वित्तीय वर्ष 2011-12 के दौरान धान खरीद में 53.15 करोड़ का गबन सामने आया है। आजमगढ़, मऊ और बलिया की 139 राइस मिलों खाद्य विभाग का फंसा 53.15 करोड़ रुपये निकालने में अधिकारियों के नाकाम होने पर इसे वित्तीय क्षति मानते हुए तत्कालीन आरएफसी, आरएमओ, डिप्टी आरएमओ और केंद्र प्रभारियों को दोषी माना गया है। कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने सभी अधिकारियों पर विभागीय और विधिक कार्रवाई की संतुति करते हुए फाइल शासन को भेज दी है। इसी के साथ पूरे प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू से कराने की संस्तुति की है।
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कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2011-12 में धान खरीद के तहत कस्टम चावल के सापेक्ष जारी आरसी वसूली की समीक्षा में पता चला कि उस वर्ष कस्टम चावल भंडारण के लिए तय तिथि 31 मार्च 2013 समाप्त होने के बाद खाद्य विभाग का 32600.94 एमटी चावल अब भी मिलों पर बकाया है। इसका मूल्य 72.82 करोड़ है। प्रकरण में आरएफसी के माध्यम से केंद्र प्रभारी, बकाएदार चावल मिल, मिल पर बकाया कुल कस्टम चावल और उसकी धनराशि और अब तक इसके सापेक्ष की गई वसूली आदि बिंदुओं की जांच कराई गई। पाया गया कि आजमगढ़ के 12 क्रय केंद्रों से संबद्ध राइस मिलों पर 5606.73 एमटी चावल बकाया है। इसकी धनराशि 1252.39 लाख रुपये धनराशि होती है। इसमें अभी भी 776.85 लाख रुपये बकाया हैं। मऊ में नौ क्रय केंद्रों पर 5950.09 एमटी चावल बकाया है। इसकी धनराशि 1329.08 लाख है। इसमें 813.12 लाख की धनराशि अब भी बकाया है। बलिया के 12 क्रय केंद्रों पर कुल 21044.12 एमटी चावल बकाया है। इसकी धनराशि 4700.67 लाख है। 3725.40 लाख की धनराशि अभी तक बकाया है।
वर्ष 2011-12 में तत्कालीन आरएफसी, आरएमओ, तीनों जनपद के डिप्टी आरएमओ, आजमगढ़ में 12, मऊ के नौ और बलिया में 12 केंद्र प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गई है। जांच में यह भी पाया गया कि तीनों जनपदों में 139 राइस मिलों में 80 राइस मिलों से बैंक गारंटी भी जमा नहीं कराई गई थी, जो कि घोर अनियमितता है। खाद्य विभाग को 53.15 करोड़ की वित्तीय क्षति हुई है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित कर उनके विरुद्ध विभागीय और विधिक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) से कराने जाने की भी संस्तुति की गई है।
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