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गांधी आश्रम की इमारत से हटा पूर्व सांसद का कब्जा

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जिलाधिकारी के आदेश पर अंबारी स्थित गांधी आश्रम से हटाया गया कब्जा। - फोटो : AZAMGARH
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आजमगढ़। अंबारी स्थित गांधी आश्रम पर पूर्व सांसद उमाकांत यादव द्वारा मकान कब्जा करने के मामले में डीएम ने कड़ा एक्शन लिया है। डीएम के आदेश पर एसडीएम ने कब्जा किए हुए मकान का ताला तोड़कर प्रशासन का ताला लगा दिया है। वहीं मकान पर उमाकांत भवन की जगह गांधी आश्रम लिखवा दिया है। इससे पहले गांधी आश्रम पर कब्जा करने के मामले में पूर्व सांसद सहित चार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।
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फूलपुर कोतवाली के पूरा हादी अंबारी गांव निवासी एवं श्री गांधी आश्रम सरायमीर के इंचार्ज लालचंद यादव पुत्र स्व. रामबुझारत यादव ने पुलिस को तहरीर दी थी कि पूरा हादी अंबारी में 1983 में श्री गांधी आश्रम के नाम भूमि का पट्टा हुआ था। वर्ष 1984 में विश्व बैंक के पैसे से श्री गांधी आश्रम के भवन का निर्माण कराया गया। वर्ष 1991 में उमाकांत यादव ने अपने नाम जमीन का पट्टा करा लिया। लालचंद के अनुसार मामला कोर्ट में चले जाने पर वर्ष 2017 में बोर्ड ऑफ रिवेन्यू इलाहाबाद से उमाकांत यादव का पट्टा निरस्त कर दिया गया। आरोप लगाया कि पूर्व सांसद उमाकांत यादव की शह पर उनके बेटों ने एक सप्ताह पूर्व 27 सितंबर की शाम को श्री गांधी आश्रम की सरकारी संपत्ति का ताला तोड़ कर उसमें रखा सामान उठवा लिया। गांधी आश्रम के बोर्ड को गुलाबी रंग से पेंट कर भवन पर उमाकांत यादव का मकान लिख कर कब्जा जमा लिया। इस मामले में चार अक्टूबर को कर्मचारी लालचंद की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व सांसद उमाकांत यादव सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को एसडीएम फूलपुर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। गांधी आश्रम में अवैध रूप से लगाए गए पूर्व सांसद के ताले को तोड़कर अपना ताला जड़ दिया और पूर्व सांसद के नाम के स्थान पर गांधी आश्रम लिख दिया गया है और वास्तविक हकदार को कब्जा दिलवा दिया गया।
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अंबारी में गांधी आश्रम की भूमि पर अवैध कब्ज की शिकायत मिली थी। अवैध कब्जे को खाली करा वास्तविक हकदार को कब्जा दिलवा दिया गया है। दर्ज एफआईआर में पुलिस जांच कर रही है। नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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- एनपी सिंह, जिलाधिकारी
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इनसेट...
पूर्व सांसद ने जिला प्रशासन पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप
अंबारी। पूर्व सांसद उमाकांत यादव ने मंगलवार की शाम प्रेसवार्ता कर अपने ऊपर लगे आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 से उक्त भवन व भूमि के खसरा-खतौनी पर मेरा ही नाम चला आ रहा है। उक्त भूमि पर मकान बना कर आज तक काबिज हूं। इसे लेकर न तो कभी कोई विवाद हुआ और न ही कभी इस जमीन पर गांधी आश्रम का नाम ही चढ़ा। प्रशासन ने जबरन मेरी जमीन हड़पने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस कृत्य से प्रदेश सरकार को बदनाम करने की कोशिश की गई है। मैं अपनी बात शासन के समक्ष रखूंगा और उम्मीद है कि मुझे सरकार से न्याय मिलेगा।
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