सगड़ी के अजमतगढ़ पारनकुंडा स्थित पशु आश्रय स्थत में बे-हाल पशु।
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लाटघाट। छुट्टा मवेशियों को रखने को लेकर सरकार ने जगह-जगह स्थाई और अस्थाई आश्रय स्थल स्थापित कराया है। इन आश्रय स्थलों पर मवेशियों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है। ऐसा नजारा अजमतगढ़ ब्लाक के पारनकुंडा गांव में बने आश्रय स्थल पर देखने को मिला रहा है। जहां दर्जनों मवेशी बीमार हैं। जिम्मेदार पूरी तरह से मौन साधे हुए है।
अजमतगढ़ ब्लाक क्षेत्र के पारनकुंडा गांव में छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए अस्थाई आश्रय स्थल बना हुआ है। वर्तमान में यहां 85 मवेशी रखे गए है। जिसमें 80 टैग लगे है तो वहीं पांच टैग विहीन है। इन 85 मवेशियों में दर्जन भर मवेशी तेज बुखार व लंगड़ी रोग से ग्रसित है। तो वहीं एक मवेशी मरणासन अवस्था में है। यहां मवेशियों की देखरेख के लिए सफाई कर्मियों की ड्यूटी लगी थी लेकिन बीते दो माह से मनरेगा कर्मी लगाए गए है। वर्तमान में इस आश्रय स्थल में गंदगी का अंबार लगा हुआ है तो वहीं मवेशियों को भरपेट भोजन तक नहीं मिल पा रहा है। एक बोरी चोकर में 85 मवेशियों को पूरे दिन खिलाया जा रहा है। जिसके चलते मवेशियों की दशा अत्यंत ही दयनीय हो गई है। यहां मवेशियों के जीवन से खिलवाड़ हो रहा है और जिम्मेदार मूकदर्शक बने हुए है। आश्रय स्थल पर ड्यूटी कर रहे मनरेगा कर्मी श्यामधर, अजय, रामभजन, तेज प्रताप, रामचंद्र, सुनील, सुरेश आदि का कहना है कि दो माह से कोई पैसा नहीं मिला है। भूसा उपलब्ध है। एक बोरा चोकर में 85 मवेशियों को पूरे दिन खिलाया जाता है। इस हिसाब से प्रति पशु एक दिन में मात्र 58 ग्राम चोकर ही उपलब्ध हो रहा है। डॉ. दुर्गाराम, पशु चिकित्साधिकारी अजमतगढ़ ने कहा कि शनिवार को ही पशु डॉक्टरों की टीम ने पारनकुंडा आश्रय स्थल पर पहुंच कर मवेशियों की जांच किया था। दर्जन भर मवेशी तेज बुखार व लंगड़ी रोग से ग्रसित है। जिसकी रिपोर्ट जिला पशु चिकित्साधिकारी को प्रेषित कर दी गई है। वहीं, ज्ञानदीप, ग्राम पंचायत अधिकारी ने कहा कि तीन माह पर भूसा के लिए डिमांड भेजा जाता है। पिछली बार 1.98 लाख की डिमांड गई थी। भूसा व चोकर पर्याप्त मात्रा में आश्रय स्थल पर उक्त धनराशि से उपलब्ध कराया गया है।