जिला अस्पताल में बंद डा. की ओपीडी।
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आजमगढ़। कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद से ही लचर हुई जिला अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था अब तक सुधार नही सकी है। ओपीडी में डॉक्टर बैठ नही रहे है जिसके चलते मरीजो को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में न तो कोई फिजिशियन था न ही सर्जन ही उपस्थित रहा। जिसके चलते दूर दराज से आये मरीजों को बैरंग वापस होना पड़ा।
सोमवार को ओपीडी कमरा 8 में डॉ आरके कुशवाहा, 9 में डॉ विमलेश, 14 में डॉ मुकेश जायसवाल अनुपस्थित रहे। इन डॉक्टरों की ओपीडी के बाहर मरीज सुबह 8 बजे से ही नंबर लगाए थे लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें ये भी नही बात सका कि डॉक्टर नही आएंगे। ओपीडी कमर नंबर 7 भी बंद था। यहां डॉ आशुतोष और डॉ पासवान बैठते है लेकिन सोमवार को दोनों अनुपस्थित रहे। इनमे से एक डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव हो गए है। वही कमरा नम्बर 14 की ओपीडी डॉ सुबास सिंह की है जो 2 माह से अस्पताल नही आये है। कमरा नम्बर 19 सर्जन कक्ष है इसमें चार डॉक्टरों की तैनाती है लेकिन सोमवार को यहां कोई नही था। कमरा नंबर 20 बच्चो की ओपीडी है। यहां भी मात्र डॉ विमल मौजूद रहे। डॉ अजीजी एक माह से गायब है। अस्पताल के ट्रामा सेंटर में चल रहे अर्थो सेक्शन का भी बुरा हाल रहा। यहां भी मरीजो की भीड़ रही पर मात्र एक डॉक्टर ही डयूटी पर थे। जिला अस्पताल की इस लचर व्यवस्था का जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन ही है। वही शासन प्रशासन भी डॉक्टरों की लापरवाही पर ध्यान नही दे रहा है। जिसके चलते ही जिला अस्पताल के डॉक्टर कोरोना काल की शुरुवात से ही भागे भागे फिर रहे है। अस्पताल में मरीज देखने पर इन्हें कोरोना का डर सता रहा है और प्राइवेट प्रैक्टिस करते समय कोरोना का डर नही लग रहा है।
सभी डॉक्टर कर रहे प्राइवेट प्रैक्टिस
आजमगढ़। सरकारी डॉक्टर अस्पताल के मरीजो की बेहतर देखभाल और इलाज करे इसके लिए सरकार वेतन के साथ नॉन पीपी भत्ता भी देती है। इसके बाद भी सभी कही न कही पीपी कर रहे है।
कई डॉक्टर मेडिकल बोर्ड गए हैं तो कुछ आइसोलेट है। डॉ सुबास सिंह दो माह से अनुपस्थित चल रहे हैं उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी गई। वही डॉ निरंजन 11 बजे तक नही आये तो उन्हें अनुपस्थित कर दिया गया। ओपीडी की व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। - डॉ. एसकेजी सिंह, एसआईसी, जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में बंद डा.आरके कुश्वाहा की ओपीडी।- फोटो : AZAMGARH