समूहन कला संस्थान के तत्वावधान में विलुप्त प्राय: लोक संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य से जिले के विभिन्न विद्यालयों में 'अपनी लोक संस्कृति को जाने-पहचाने' कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले सत्र में 'महक माटी की' प्रस्तुत की गई। जिसमें विलुप्त हो रही लोक संस्कृति धोबिया, कहरउवा एव जांघिया नृत्य का प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर इन विधाओं की चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई।
चार दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभा निकेतन इंटर कालेज और एएन मेमोरियल स्कूल में प्रदर्शनी एवं धोबिया नृत्य की प्रस्तुति की गई। शुरुआत संजीव पांडेय, दिनेश सिंह सैनी, रमाकांत वर्मा, धु्रवचंद मौर्य और दीनानाथ लाल श्रीवास्तव ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद जीवन राम और साथियों ने पारंपरिक धोबिया नृत्य की लुभावनी प्रस्तुति दी। इस नृत्य में नर्तक और एक लिल्ली घोड़ी के साथ नृत्य करने वाले कलाकार और वादक वृंद की भूमिका भी अहम दिखी।
अपने पारंपरिक परिधान घाघरा, पैजामा, पगड़ी के साथ कलाकार खूब जमे, वहीं वाद्य यंत्रों में पखावज, कसावर, ड़ेढ़ताल, मजीरा, कमर मे बधीं घंटियां रणसिंहा ने आकर्षण और कौतूहल के साथ-साथ धोबिया नृत्य के पारंपरिक स्वरुप को प्रस्तुत किया। जीवन राम के साथ कलाकारों में रामजनम, नंदू, विजय, राकेश, लौटू, सोनू, अजय, लल्लन आदि ने सराहनीय प्रदर्शन किया। उधर प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने धोबिया, कहरउवा एव जांघिया नृत्य की कई जानकारियां प्राप्त की। संस्था के निदेशक राजकुमार शाह ने सभी का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का प्रबंधन अजय उपाध्याय और संचालन संजीव पांडेय ने किया।