महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के पादप प्रजाति वनस्पति विज्ञान में शुक्रवार को डीएनए बारकोडिंग और लीनियस वर्गीकरण में चुनौतियां विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी की उभरती तकनीकों से अवगत कराना है। मुख्य अतिथि साइटोजिन शोध एवं विकास संस्थान, लखनऊ के निदेशक सुजीत कुमार सिंह,ने डीएनए बारकोडिंग तकनीक के प्रायोगिक और सामाजिक उपयोगों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि डीएनए बारकोडिंग तकनीक के जरिये अब न सिर्फ पौधों की प्रजातियों की शुद्ध पहचान संभव हो पाई है, बल्कि यह तकनीक आयुर्वेदिक दवाओं की प्रमाणिकता जांच, फॉरेंसिक विज्ञान, अपराधियों की पहचान और प्राकृतिक आपदाओं में लापता लोगों की शिनाख्त में भी आसान हुई है।
उन्होंने छात्रों को डीएनए नमूनों की प्रयोगशाला तकनीकों, प्रक्रिया, और उनके विश्लेषण के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान की बारीकियों से परिचित कराती हैं। कहा कि कार्यशाला से वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा मिलेगा। समाज को लाभ होगा।
इस माैके पर डॉ. प्रियंका सिंह, अमित गुप्ता, डॉ. पल्लवी सिंह, डॉ. विपिन उपस्थित रहे।