लालगंज तहसील की लाइब्रेरी को राज्य विधिक परिषद की ओर से उपलब्ध कराई गई विधि संबंधी किताबें गायब हैं। जरूरत पड़ने पर अधिकारी और अधिवक्ता विधि की इन किताबों का अध्ययन कर किसी नतीजे पर पहुंचते थे। किताबें गायब होने से तहसील के अधिवक्ताओं में हड़कंप मचा है। एसडीएम ने पूरे घटनाक्रम की जांच कराकर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया है।
बता दें कि तहसील मुख्यालय से किसानों की जमीन, जायजाद संबंधी मामलों का निस्तारण किया जाता है। जालसाजी करके दूसरे की जमीन हड़प लेने और जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर उसकी जमीन हड़पने के मामले आते रहे हैं। इस प्रकार के जमीन, जायजाद से जुड़े तमाम मामलों का निस्तारण तहसील स्तर पर किया जाता है। धोखाधड़ी के मामलों को अधिवक्ता से गंभीरता से लेते हैं। कई-कई पेचीदें मामलों के निस्तारण में महीनों लग जाते हैं।
मुकदमे के फैसले के लिए कई अधिकारी नए होने की वजह से उन्हें पूरी जानकारी नहीं हो पाती। ऐसे लोगों की मदद के लिए राज्य विधिक परिषद की ओर से एक लाख से अधिक मूल्य की कानून किताबें तहसील की लाइब्रेरी को मुहैया कराई गई थी। वादों के निस्तारण में अधिवक्ता और अधिकारी इन्हीं किताबों की मदद लेते थे।
इन किताबों की नियमावली के तहत जटिल मामलों का भी हल निकाल लिया जाता था लेकिन बीते कुछ दिन पूर्व तहसील परिसर में स्थित लाइब्रेरी से एक लाख से अधिक मूल्य की कीमती कानून की किताबें गायब हो गईं। कुछ लोग इसके लिए एक अधिकारी तो कुछ लोग कर्मचारियों को दोषी ठहरा रहे हैं। लालगंज तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता लालजी सिंह ने पुस्तकों के गायब होने को गंभीरता से लिया है और इसकी जांच कर दोषी पाए गए व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ता संतोष राय ने कहा कि यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि आखिर कानून की कीमती किताबें कैसे गायब हो गईं। अधिवक्ता इंद्रभानु चौबे, विनय शंकर राय, विजय प्रकाश पांडेय ने भी लाइब्रेरी से किताबें गायब होने पर आश्चर्य व्यक्त किया।