कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं अधिवक्ता राजनरायन सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री अंगद यादव के बेटे आलोक यादव सहित सात लोगों के खिलाफ शनिवार को शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई। केस दर्ज कराने वाले अधिवक्ता का आरोप है कि वह अंगद के समधी के साथ मुकदमे की पैरवी के लिए दीवानी न्यायालय जा रहे थे।
कचहरी के पास आलोक उन्हें रोका और मुकदमे की पैरवी न करने की धमकी दी। भयभीत वकील ने इस संबंध में डीआईजी सहित अन्य अधिकारियों को पत्र दिया था। जिसकी जांच चल रही थी। जांच के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
बरदह गांव निवासी रोहित तिवारी इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत करते हैं। बरदह थाने के सम्मोपुर गांव निवासी अधिवक्ता राजनरायन सिंह और उनके मित्र रामदुलार यादव से उनकी घनिष्ठता है। रामदुलार और उनके समधी अंगद यादव के बीच चल रहे मुकदमे की पैरवी रोहित तिवारी ही करते है।
उनका आरोप है कि 15 दिसंबर 2015 को मुकदमे की तारीख थी। इसके लिए वे इलाहाबाद से आए थे। बस से उतरकर वे कचहरी के पारिवारिक न्यायालय के पास पहुंचे तभी आलोक यादव अपने छह, सात समर्थकों को लेकर वहां पहुंचा और उन्हें धमकी देते हुए दुबारा वहां न आने के लिए कहा।
उनके तेवरों से भयभीत रोहित तिवारी ने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा, पर बाद में डीजीपी, डीआईजी और एसपी को पत्र देकर उन्होंने मामले की जानकारी दी। एसपी ने मामले की जांच शहर कोतवाल को सौंपी थी। जांच पूरी होने के बाद शनिवार को इस मामले में आलोक यादव सहित सात लोगों के खिलाफ जान मारने, दहशत फैलाने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई।
गौरतलब है कि रोहित तिवारी ने धमकी मिलने की बात अधिवक्ता राजनरायन सिंह को बताई थी तो उन्होंने भी खुद को धमकाए जाने की जानकारी दी। इसके चार दिन बाद 19 दिसंबर को पल्हनी ब्लाक मुख्यालय के सामने राजनरायन सिंह की हत्या कर दी गई। इस मामले में पूर्व मंत्री अंगद यादव सहित हत्या करने वाले दोनों शूटर गिरफ्तार कर लिए गए हैं।