आजमगढ़। जिला जेल में शनिवार को हुई हिंसक घटना के पीछे मुख्य वजह जेल कर्मचारियों की ओर से बंदियों को दी गई ‘थर्ड डिग्री’ रही। जेल कर्मियों ने उन बंदियों की जमकर पिटाई की थी जिनके पास से मोबाइल बरामद हुआ था। जेल के कर्मचारी एक तरफ जहां बंदियों को पीट रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ यह भी कह रहे थे कि जब भीतर मोबाइल चलाने आदि के लिए खुली छूट दी गई है, तो मोबाइल कैसे बरामद हो गई। बंदियों की पिटाई का दर्द अभी खत्म भी नहीं हो पाया था कि भोजन के लिए बैरकों के द्वार खोल दिए गए। मोबाइल जब्त होने और पिटाई से नाराज बंदियों ने जेल में तोड़फोड़ और उपद्रव शुरू कर दिया।
बता दें कि जेल के भीतर धड़ल्ले से मोबाइल चलने का मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में काफी दिनों से था। पुलिस जेल के गतिविधियों पर पल-पल की नजर रखे हुए थी। इसी क्रम में शनिवार को सूचना की पुष्टि होने पर डीएम ने जेल में छापेमारी कराई थी। अचानक हुई इस कार्रवाई में लगभग 35 मोबाइल बरामद होने से जेल प्रशासन की पोल खुल गई। भीतर मोबाइल पर बात करते हुए कई बंदियों को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। करीब दो घंटे तक चली इस कार्रवाई के बाद एडीएम प्रशासन नरेंद्र सिंह और एसपी सिटी कमलेश बहादुर जेल से बाहर निकल गए। इस दौरान जेल के अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अधिकारियों की चेतावनी और व्यवस्था की पोल खुलने से नाराज जेल के अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से जेल के भीतर बैरकों में घुसकर बंदियों को खूब पीटा गया। जेल सूत्रों के मुताबिक इन लोगों ने मारा कि कई बंदियों के मुंह आदि से खून निकलने लगा। इस पिटाई से नाराज होकर बंदियों ने बवाल कर दिया और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग रखी। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने भी इस बात को स्वीकार किया। रात करीब 11 बजे अधिकारियों ने बंदियों की मांग को स्वीकारते हुए उपद्रव को शांत कराया गया।
जेल में हर बात का बंधा हुआ है शुल्क
आजमगढ़। कहने को तो यह जेल है, यहां भीतर की सारी सुविधाएं सरकार मुहैय्या कराती है, लेकिन शनिवार को जेल के भीतर हुई घटना से यह भी उजागर हो गया कि जेल के अंदर बंदी अपना दिन कैसे काट रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक जेल में हर काम का अलग अलग शुल्क तय है। जेल के भीतर सामान्य मोबाइल एक महीने तक इस्तेमाल करने का पांच रुपया, एंड्रायड फोन के जरिए फेसबुक और वाट्सएप चलाने के लिए एक हजार रुपये बंधा हुआ है। जेल के अंदर सब्जी की टोकरी, साबुनदानी आदि में छिपाकर मोबाइल को ले जाया जाता है। जेल के भीतर बंदी कोई भी सामान खरीदे, प्रत्येक सामान का निर्धारित मूल्य से पांच-दस रुपये बढ़ाकर देने पर ही सामान उपलब्ध होता है। जेल सूत्रों के मुताबिक मनचाहा बैरकों में शिफ्ट होने का भी अच्छाखासा चार्ज लिया जाता है। जेल से होने वाली आमदनी का हिस्सा नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों का जाता है।
जेल अधिकारी करेंगे जांच तो दब जाएगा मामला
आजमगढ़। जेल के भीतर से शनिवार को एक दो नहीं बल्कि 35 से अधिक मोबाइल बरामद होने के बाद जेल की व्यवस्था की पोल खुल गई। हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि इससे पूर्व भी जेल के भीतर प्रतिबंधित सामान, मोबाइल आदि बरामद हो चुका है। हर बार जेल के अधिकारियों से जांच कराई गई, लेकिन नतीजा किसी भी मामले का अब तक नहीं निकल सका। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की बजाय जेल अधिकारी पूरे मामले को पानी की तरह पी गए। ऐसे में शनिवार को हुई घटना की यदि जेल के अधिकारियों से जांच कराई गई तो इस बार भी कोई नतीजा नहीं निकलेगा। इनकी लापरवाही का खामियाजा जिला प्रशासन और पुलिस को भुगतना पड़ सकता है।
पूर्व की घटनाओं पर गौर करें तो वर्ष 2015 में जेल के भीतर से अपराधी फोन कर लोगों से रंगदारी मांग रहे थे। जेल के भीतर से बंदी जहां फोन कर लोगों को धमका रहे थे। वहीं जेल प्रशासन मौन साधे हुए था। जबकि पुलिस घटनाओं पर रोक नहीं लगा पा रही थी। जेल के भीतर से लगातार फोन होने से परेशान तत्कालीन एसपी आकाश कुलहरि ने छापेमारी कर 54 मोबाइल बरामद किया। यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी। दोषी जेल कर्मचारियों के खिलाफ डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज को जांच सौंपी गई, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बजाय मामला दबा दिया गया। इसी क्रम में वर्ष 2016 में तत्कालीन एसपी अजय कुमार साहनी ने जिला अस्पताल में छापेमारी कर आधा दर्जन बंदियों को शराब पीते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह लोग बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल से नेटवर्क चला रहे थे। इस मामले में भी कार्रवाई की बजाय दबा दिया गया। इसी क्रम में नवंबर 2018 में बंदी जेल के भीतर दीपावली का जश्न मनाकर वीडियो सार्वजनिक कर दिया। यह मामला सुर्खियों में आने पर आईजी जेल प्रकाश चंद्र ने डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज को जांच तो सौंपा, कार्रवाई की रिपोर्ट भी गई, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी। फाइल दफ्तर में धूल फांक रही है। ऐसे में शनिवार को पुन: जेल के भीतर से 35 मोबाइल बरामद हुए। बंदियों और पुलिस के बीच गुरिल्ला युद्ध चला, इस मामले की भी जांच आईजी जेल ने डीआईजी जेल फैजाबाद को सौंपी है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा कि क्या पहले के मामलों की तरह यह भी जांच के नाम पर दबा दिया तो नहीं जाएगा। शनिवार को जेल में हुए सर्च आपरेशन के बाद भी मोबाइल चल रहा है।
डीआईजी जेल को जांच
लखनऊ। आजमगढ़ जिला जेल में शुक्रवार को दो गुटों के आपस में भिड़ने के बाद शनिवार को हुई तलाशी में मोबाइल फोन व अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ। तलाशी के बाद जब फोर्स और प्रशासनिक अधिकारी वापस चले गए तो कैदियों ने एकजुट होकर बंदी रक्षकों पर पथराव शुरू कर दिया। एडीजी जेल चंद्र प्रकाश ने बताया कि कुछ देर बाद जब अधिकारी मय फोर्स मौके पर पहुंचे तो बंदी अपनी बैरकों में चले गए और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि पथराव में कोई घायल नहीं हुआ है। एडीजी ने बताया कि डीआईजी जेल फैजाबाद श्रीपर्णा गांगुली को मौके पर रवाना किया गया है। वह प्रकरण की जांच करेंगी। जांच में इसका भी पता लगाया जाएगा कि जेल में मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। एडीजी ने कहा कि इसके लिए जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।