लालगंज। देवगांव कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 27 मार्च की रात शौच करने जा रही किशोरी को घायल कर मनबढ़ों ने बलात्कार किया था। दूसरी बहन को अगवा करते समय शोर मचाने पर आरोपी फरार हुआ। भागने के दौरान छूटी हुई चप्पल से उसकी पहचान हुई। इन सबके बावजूद पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाय मामले में लीपापोती कर रही है। इसका खुलासा बुधवार को पीड़िता के घर पहुंची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रदेश प्रभारी और सामाजिक न्याय आयोग गाजीपुर के जिलाध्यक्ष कुमारी कुसुम यादव साक्षी और उनकी टीम के समक्ष हुआ। पीड़िता के परिवार और गांव वालों से बातचीत करने के बाद आयोग की टीम सीएचसी लालगंज और देवगांव कोतवाली भी गई और घटनाक्रम की जानकारी ली।
टीम के समक्ष पीड़िता ने घटनाक्रम के बारे में बताया कि 27 मार्च की रात उसे घर से अगवा कर आरोपी ट्यूबवेल पर ले गए और उससे बलात्कार किया। विरोध करने पर सिर पर प्रहार कर बेहोश कर दिया। वहीं किशोरी के घर वालों ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी तब हुई जब पड़ोसी पवन राय उनकी दूसरी बेटी को अगवा करने के लिए घर पहुंचा। उसके शोर मचाने पर भागने लगा। इस दौरान उसकी छूट चप्पल से उसकी पहचान हुई और दूसरी बेटी को लोग तलाशना शुरू किया गया। गांव के लोगों ने बताया कि पवन राय की पहचान होने पर पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया। लेकिन चालान दो दिन बाद 29 मार्च को किया गया। आयोग की टीम के समक्ष ग्रामीणों ने बताया कि घटना में कार्रवाई के विषय में पूछने पर विवेचक कहते हैं कि मेरे ऊपर बहुत दबाव है। आयोग की टीम सीएचसी लालगंज पहुंची और साथ ही देवगांव कोतवाली भी पहुंची। जहां थाने पर मौजूद सिपाही उस महिला कांस्टेबल का नंबर नहीं दे सका, जो घटना के बाद किशोरी को लेकर अस्पताल गई थी। आयोग की टीम ने कहा कि घटना के बाद से ही पीड़िता के घर वालों को धमकी दी जा रही है। इस पर पुलिसवालों ने कहा कि यदि इस तरह की शिकायत मिली होती तो जरुर कार्रवाई की जाती। ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली। टीम के सदस्यों ने कहा कि पीड़िता को हर हाल में न्याय दिलाकर रहेंगे। इस अवसर पर इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग की प्रभारी सुमन यादव उर्फ साक्षी के साथ अमन, डा. वीके सिंह, अनिल यादव, उमेश पांडे, प्रदीप वर्मा, मोहम्मद आलम अंसारी आदि मौजूद रहे।