आजमगढ़। सरकार लाख भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावे कर रही हो लेकिन भ्रष्टाचार व सरकारी धन के गबन की घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी द्वारा खुद के और पत्नी के फर्जी बिल लगा कर साढ़े अट्ठाइस हजार रुपये का चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्राप्त करने का मामला प्रकाश में आया है। इस बाबत शहर के कटरा मुहल्ला निवासी अरुण कुमार सिंह ने शहर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया है।
सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सा व्यय का भुगतान किया जाता है। इसमें कर्मचारी स्वयं और पत्नी के इलाज पर हुए खर्च को सरकार से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के रुप में बिल आदि लगा कर प्राप्त करता है। सरकार की इस योजना के तहत जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में तैनात सहायक गिरीश चंद्र ने पत्नी कुसुमलता के बीमारी का फर्जी बिल बाऊचर लगा कर चिकित्सा प्रतिपूर्ति के रुप में 28447 रुपये का गबन कर लिया। गिरीश द्वारा यह प्रतिपूर्ति प्राप्त करने का मामला 2014 का है और 2017 में ही प्रकाश में आ गया था। तब से इस प्रकरण में तमाम तरह की जांच भी हुई, जिसमें इस फर्जीवाडे की पुष्टि भी हुई।
रविवार को शहर के कटरा मुहल्ला निवासी अरुण कुमार सिंह ने शहर कोतवाली में जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में तैनात सहायक गिरीश चंद्र व उनकी पत्नी कुसुमलता के नाम मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर दी। जिसके आधार पर शहर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत कर आगे की कार्रवाई कर रही है।