दीपावली पर घर-आंगन रोशन करने के साथ इस बार मिट्टी के हुनर को भी बाजार मिलेगा। कुम्हारों और शिल्पकारों की कला को नई पहचान दिलाने के लिए एक नवंबर से डॉ. आंबेडकर पार्क में सात दिवसीय माटीकला महोत्सव-2026 शुरू होगा।
सात नवंबर तक चलने वाले मेले में 25 स्टालों पर मिट्टी से बने पारंपरिक और आकर्षक उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। जिला ग्रामोद्योग अधिकारी दीपक मिश्रा ने बताया कि मेले में निजामाबाद की जीआई टैग प्राप्त विश्वप्रसिद्ध ब्लैक पाटरी और चुनार की पारंपरिक टेराकोटा कला खास आकर्षण होंगी।
इसके अलावा मिट्टी के दीये, डिजाइनर दीये, सजावटी लालटेन, मटकी, ढकनी, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, पूजा सामग्री और छठ पर्व में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के उत्पाद भी सजेंगे। मेले में 25 स्टाल निशुल्क लगाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को सीधे बाजार उपलब्ध कराना, उनकी आमदनी बढ़ाना और पारंपरिक माटीकला को प्रोत्साहित करना है। स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी यह आयोजन महत्वपूर्ण होगा।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने लोगों से इस दीपावली मिट्टी के दीये और स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील की। कहा कि इससे न केवल त्योहार की परंपरा जीवंत रहेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों के घरों में भी खुशहाली का उजाला पहुंचेगा।