उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव को लेकर जनता ने अपने मुद्दों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है। पांच साल में क्या बदला और क्या अब भी जस का तस है, इसका जवाब नेताओं के मंच से नहीं, बल्कि गांव, बाजार और मोहल्लों में मिल रहा है। अमर उजाला की टीम 'सत्ता का संग्रा' अभियान के तहत इसी जमीनी हकीकत को समझने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच रही है। क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में लोगों से हुई बातचीत में सरकार की कानून-व्यवस्था से लेकर किसान सम्मान निधि, रोजगार, व्यापार की सुरक्षा, सड़क, बिजली, पानी और जल निकासी तक के मुद्दे सामने आए। कई लोगों ने मौजूदा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की तारीफ की तो कुछ ने स्थानीय विकास की रफ्तार पर सवाल खड़े किए। जनप्रतिनिधि के कामकाज को लेकर भी लोगों की राय बंटी दिखी। ऐसे में 2027 की सियासी लड़ाई में जनता किसे मुद्दा बनाएगी और किस काम को वोट का आधार मानेगी, इसकी तस्वीर अभी से उभरने लगी है।
पिछले पांच साल में कितना बदला मेहनगर?
'सत्ता का संग्रा' अभियान के तहत अमर उजाला की टीम ने मेहनगर विधानसभा के विभिन्न इलाकों में जनता से बातचीत की। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि विधायक द्वारा यहां कोई खास काम नजर नहीं आता है और जमीनी स्तर पर उन्होंने काम नहीं किया है। इस बात को लेकर उन्होंने विधायक के प्रति नाराजगी जाहिर की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है और सरकार ने सड़कों पर भी काम किया है।
योगी सरकार की योजनाओं को लेकर क्या बोले मेहनगर के किसान
आजमगढ़ जिले के मेहनगर विधानसभा क्षेत्र के किसानों से बात करने पर पता चला कि भाजपा सरकार में किसानों के लिए काफी कुछ हुआ है। किसानों ने किसान सम्मान निधि मिलने, सड़कों के निर्माण, खाद की समय पर उपलब्धता, बिजली और पानी की व्यवस्था में सुधार का उल्लेख किया। किसानों का कहना है कि पहले खाद के लिए 10 दिन इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब यह समस्या नहीं है। साथ ही, किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य भी मिल रहा है।