आजमगढ़। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से गोरखपुर को जोड़ने के लिए आजमगढ़ से गोरखपुर तक गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। जनपद से भी इसका कुछ हिस्सा गुजर रहा है...लेकिन भूमि खरीद कम होने से दिक्कतें आ रही है। वहीं अन्य जनपदों में 90 फीसद से अधिकर खरीद पर निर्माण शुरू कराया जा चुका है। किसानों के विरोध और कुछ अन्य कारणों से जनपद में खरीद प्रभावित है। इससे शासन भी चिंतित है। हालांकि खरीद के साथ ही अधिग्रहण के लिए भी कार्यवाही शुरू कर दी गई है, लेकिन अधिग्रहण हुआ तो किसानों को मुआवजे के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि इसकी प्रक्रिया लंबी चलती है। विभाग फिलहाल बैनामे पर जोर दे रहा है। जुलाई माह में 90 फीसद खरीद की लक्ष्य रखा गया है।
लखनऊ से गाजीपुर तक बन रहे सिक्स लेन के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का कार्य जोर-शोर से जारी है। इस एक्सप्रेस-वे से गोरखपुर को लिंक एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाना है। ये आजमगढ़ से शुरू होकर अंबेडकरनगर, संत कबीरनगर होते हुए गोरखपुर पहुंचेगा। इसके लिए सभी जनपदों में किसानों से जमीन की खरीद चल रही है। जनपद में लगभग 20 किमी लंबा एक्सप्रेस-वे दो तहसीलों के 41 गांवों से होकर गुजरेगा। इसमें फूलपुर तहसील के दो गांव और बूढ़नपुर तहसील के 39 गांव शामिल हैं। इसमें सरकारी भूमि का पुनर्ग्रहण हो चुका है। किसानों से कुल 230 हेक्टेयर भूमि की खरीद की जानी है। अभी तक जनपद में 57 फीसद जमीन की ही खरीद हो पाई है। शासन से मिले 160 करोड़ रुपये में 140 करोड रुपये खर्च हो चुके हैं। जबकि अन्य जनपदों में अच्छी-खासी खरीद होने के साथ ही वहां पर निर्माण का कार्य भी शुरू करा दिया गया है।
किसानों को विरोध डाल रहा अड़चन
आजमगढ़। आजमगढ़ में जमीन की खरीद शुरू नहीं होने से निर्माण अभी शुरू नहीं हो पाया है। इसके लेकर जिला प्रशासन के साथ ही शासन भी काफी चिंतित है। जमीन की खरीद शुरू होने के साथ ही अतरौलिया क्षेत्र के कई गांवों के किसानों भूमि के रोट को लेकर विरोध शुरू कर दिया था। इसे लेकर आंदोलन भी हुआ था। तत्कालीन डीएम एनपी सिंह की पहल के बाद शासन से बातचीत हुई। इसके बाद भूमि के रेट में कुछ बदलवा कर उसे बढ़ाया भी गया था, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हुए। अब भी कई गांवों में विरोध जारी है। जमीन खरीद के गति नहीं पकड़ने के कारण शासन की ओर से कई गांवों में भूमि अधिग्रहण के लिए सर्वे भी करा चुका है। इसके साथ ही किसानों के साथ खुली बैठक कर उनकी राय भी ली जा चुकी है।
अधिग्रहण से पहले होगी प्रत्येक कोशिश
आजमगढ़। सूत्रों की मानें तो शासन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से प्रत्येक कोशिश कर लेना चाहता है। एक तो अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबी चलती है। इसमें किसानों को मुआवजा भी देर से मिलेगा। संभावना इस बात की है कि अधिग्रहण करने पर किसानों का विरोध तेज हुआ तो परियोजना खटाई में पड़ सकती है। शासन इसे किसी भी कीमत पर जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है। जुलाई माह में 90 फीसद भूमि खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसलिए लेखपालों को प्रत्येक किसानों पर लगाया गया है कि वो उनको समझाएं। बैनामा कराने पर जोर दें। इसके साथ ही निर्माण शुरू करने के लिए अभी उक्त भूमि पर बुआई आदि पर भी रोक लगाई जा सकती है। साथ ही बैनामा करने में असहमति जताने वाले किसानों की सूची भी बनाई जाएगी।
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए कृषि क्षेत्र की भूमि ली जा रही है। शासन इस भूमि का सर्वोत्तम रेट दे रहा है। किसानों को जल्द से जल्द बैनामा करना चाहिए। एक्सप्रेस-वे का निर्माण होने से क्षेत्र का विकास होगा। अधिग्रहण की प्रक्रिया में मुआवजा मिलने में दे होती है। बैनामा होने पर किसानों को तुंरंत मुआवजा मिलेगा। मेरी अपील है किसान जल्द से जल्द बैनामा करें। - राजेश कुमार जिलाधिकारी