इंटरनेट की दुनिया से लेकर अनजान शहरों तक बच्चों को मानव तस्करी, साइबर ठगी, बाल श्रम और यौन शोषण जैसे अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में मानव तस्करी विरोधी सहायता क्लब (एएचटीसी) का गठन किया जाएगा।
क्लब के माध्यम से छात्र स्वयं जागरूक होकर दूसरों को भी सतर्क करेंगे और ‘बाल प्रहरी’ की भूमिका निभाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जिले के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में एएचटीसी क्लब गठित करने के आदेश जारी किए हैं।
इसके तहत पांच अगस्त 2026 तक सभी विद्यालयों को क्लब गठन की रिपोर्ट, समिति का विवरण और फोटोग्राफ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करना होगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक अजय कुमार ने बताया कि क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर ठगी, संदिग्ध नौकरी या विवाह के विज्ञापन, मानव तस्करी के तरीकों और सुरक्षा के उपायों की जानकारी दी जाएगी।
साथ ही उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित एजेंसियों तक कैसे पहुंचाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में क्लब का गठन नहीं करने वाले विद्यालयों की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
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कैसी होगी क्लब की संरचना
प्रत्येक विद्यालय में एएचटीसी क्लब की अध्यक्षता प्रधानाचार्य करेंगे। समिति में एक वरिष्ठ शिक्षक के साथ कक्षा 9 से 12 तक प्रत्येक कक्षा से एक-एक छात्र और एक-एक छात्रा को सदस्य बनाया जाएगा। यह टीम एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), पुलिस और विशेषज्ञों के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम चलाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तैयार हुई एसओपी
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद गृह मंत्रालय और पुलिस की बाल सुरक्षा इकाइयों ने मानव तस्करी की रोकथाम के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इसके तहत रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, मॉल, सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। सभी विद्यालयों की रिपोर्ट सात अगस्त तक राज्य स्तरीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।