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चकिया दोहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी ने न्यायालय में किया समर्पण

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आजमगढ़। निजामाबाद के चकिया हुसैनाबाद की घटना के मुख्य आरोपी ने गुरुवार को कोर्ट में समर्पण कर दिया। इतना ही नहीं खुद के नाबालिग होने का प्रमाण पत्र लगा कर वह किशोर न्याय बोर्ड पहुंच गया और फिर बाल संरक्षण गृह मऊ भेज दिया गया। वादी मुकदमा की तरफ से अधिवक्ता लाल बहादुर सिंह ने इस समर्पण पर सवालिया निशान खड़ा किया है।
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बीते 12 अक्टूबर को चकिया हुसैनाबाद गांव में अशमर व काजिम की चाकू मार कर हत्या कर दी गई थी। वहीं एक अन्य युवक मुशीर भी इस घटना में घायल हुआ था जो अभी वाराणसी में जीवन मौत से जूझ रहा है। घटना के बाद मौके से मिले एक मोबाइल ने इस घटनाक्रम में पुलिस की संलिप्तता की पुष्टि कर दी थी। मुख्य आरोपी के पिता की वह मोबाइल थी, जिससे तत्कालीन एसओ निजामाबाद से व्हाटसएप पर चैट की गई थी। इसमें लेनदेन के साथ ही अशमर का भी जिक्र था। घटना के बाद से पुलिस मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर दबिश दिए जाने का दावा कर रही है तो वहीं मुख्य आरोपी ने गुरुवार को न्यायालय में समर्पण कर दिया। यहां वो खुद के नाबालिग होने का प्रमाण पत्र लगा कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश हुआ जहां से उसे बाल संरक्षण गृह मऊ भेज दिया गया। वहीं वादी की तरफ से वकील वरिष्ठ अधिवक्ता लालबहादुर सिंह ने इस समर्पण पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को कचहरी में हड़ताल थी, इसके बाद भी मुख्य आरोपी कैसे समर्पण किया। इतना ही नहीं किशोर होने के प्रमाण के रूप में उसने मूल प्रमाण पत्र के बजाए फोटो कापी प्रयोग किया है, जो प्रमाणित भी नहीं है। किशोर न्याय बोर्ड के अध्यक्ष को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड में पुलिस की संलिप्तता की पुष्टि हो चुकी है। एसओ को एसपी ने निलंबित कर दिया है। इसे बाद भी आरोपियों को बचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे है। इसी के तहत मुख्यआरोपी को किशोर बता कर उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष बिना न्यायाधीश की उपस्थिति में प्रस्तुत कराया गया और फिर बाल संरक्षण गृह मऊ भेज दिया गया।
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