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लिपिक को आरोप-पत्र, अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार

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आजमगढ़। सपा शासनकाल में गंभीरवन में प्रस्तावित पशु चिकित्सा महाविद्यालय के स्थानांतरित होने के बाद भी विवादित भूमि को लगभग सात करोड़ रुपये अनियमित तौर पर भुगतान करने के मामले में आरोपी लिपिक को आरोप-पत्र जारी कर दिया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व को इसकी जांच सौंपी गई है। वहीं, भुगतान में अधिकारियों भूमिका की जांच कर रहे सीडीओ की जांच भी लगभग पूरी हो गई है। एक-दो दिन में जांच रिपोर्ट सौंपे जाने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बाद मामले में कार्रवाई होगी।
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जनपद में सपा शासनकाल में पशु चिकित्सा महाविद्यालय बनाने की घोषणा की गई थी। लगभग 259 करोड़ की लागत से बनने वाले इस महाविद्यालय के लिए सदर तहसील के गंभीरवन में जमीन भी चिह्नित हुई थी। शासन से लगभग 20 करोड़ रुपये जमीन खरीद के लिए आए थे। काफी जमीनों का किसानों से बैनामा भी कराया गया था। जमीन के विवादित होने के कारण तत्कालीन डीएम सुहाष एलवाई ने भुगतान पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही इस प्रोजेक्ट के भी अन्यत्र स्थानांतरित करने की बात कही गई थी। इस बीच फिचले कुछ माह में इस विवादित भूमि का लगभग सात करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया था। मामले के जानकारी में आने के बाद जिलाधिकारी एनपी सिंह ने प्रकरण की जांच सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला को सौंपी थी। अमर उजाला की ओर से इस मामले को प्रमुखता के साथ उठाया गया था। जांच में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए थे।
इस बीच जिलाधिकारी एनपी सिंह के निर्देश पर विशेष भूमि अध्यप्ति कार्यालय के आरोपी लिपिक आनंद मिश्रा को आरोप-पत्र जारी कर दिया गया है। साथ ही इसकी जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व गुरु प्रसाद को सौंपी गई है। सूत्रों की माने तो आरोपी कर्मचारी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया गया है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। वहीं, प्रकरण में अधिकारियों की संलिप्तता की जांच कर रहे सीडीओ आनंद शुक्ला की जांच भी लगभग पूरी हो चुकी है। फिलहाल वो सोमवार को अवकाश पर थे। वापस आते ही उम्मीद जताई जा रही है कि वो रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप देंगे। इसके बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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पशुपालन विभाग पर भी गहराया शिकंजा
आजमगढ़। गंभीरवन में जिस विवादित भूमि का भुगतान किया गया है उसकी रजिस्ट्री पशुपालन विभाग की ओर से कराई गई थी। प्रकरण की जांच में ये कहा जा रहा है कि वर्तमान सीआरओ एवं विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी को भूमि के भुगतान पर लगाई गई रोक की जानकारी ही नहीं थी। क्योंकि उनकी जनपद में तैनाती पिछले वर्ष ही हुई है। साथ ही प्रोजेक्ट के अन्यत्र स्थानांतरित होने के बारे में पशुपालन विभाग की ओर से कोई जानकारी भी नहीं दी गई थी। ऐसे में सीडीओ की ओर से ये जांच की जा रही है कि यदि प्रोजेक्ट स्थानांतरित हो गया था और भुगतान पर रोक लगी थी तो इन आदेशों नौ दबाकर रखा था।
प्रकरण में आरोपी लिपिक को आरोप-पत्र जारी कर दिया गया है। एडीएम फाइनेंस को जांच अधिकारी बनाया गया है। सीडीओ की भी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही मिलने की उम्मीद है। इसी बात को स्पष्ट किया जा रहा है कि विवादित भूमि के भुगतान में किस अधिकारी का दोष है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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एनपी सिंह जिलाधिकारी
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