फूलपुर तहसील क्षेत्र के मेजवां गांव में सातवीं मोहर्ररम पर जुलूस अलम और दुलदुल का जुलूस अकीदत से निकाला गया। इस दौरान अंजुमनों ने नौहा और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की। इस दौरान जुलूस में रास्ते भर या हुसैन, या अब्बास और या अली की दर्दभरी सदाएं गूंजती रहीं। अजादारों ने जमकर सीनाजनी की।
बुधवार को अलम और दुलदुल का जुलूस मरहूम सैयद अली सफदर के अजाखाने से निकाला गया। मजलिस से पूर्व पेेशख्वानी की गई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन्र और उनके 72 साथियों की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। जिन्होंने इंसानियत और इस्लाम को बचाने की खातिर अपने कुनबे तक की शहादत दे दी। कर्बला के यह बयान सुनकर अजादार जोरोकतार रो पड़े। इस दौरान बाहर से आई अंजुमन फरोगे अजा चमावां, अंजुमन अजादारिया फत्तेपुर ने नौहा मातम पेश किया।
जुलूस गांव के विभिन्न अजाखाने से होता हुआ पुन: अली सफदर के अजाखाने पहुंचा, जहां स्थानीय अंजुमन अब्बासिया और अजादारियां ने सयुंक्त रूप से नौहा पेश किया।
उधर, फूलपुर कस्बा में में भी अलम का जुलूस अख्तर केक चौक से निकलकर शिया आबादी पहुचां जहा अन्जुमन मासूमिया जूलुस को लेकर आगे बढ़ी। जुलूस मछली मार्केट, लखनऊ-बलिया मार्ग होते हुए कर्बला पहुंचा। सुरक्षा की दृष्टि से जुलूस के साथ पुलिस और पीएसी के जवान चल रहे थे।