पहले नोटिस चस्पा होने के बाद तीन और हिस्सेदार आ गए थे सामने
नगर पंचायत की ओर से इस मकान को तोड़ने का प्रयास पहले भी किया गया था। इसके लिए बाकायदा नोटिस चस्पा की गई थी। इस बीच मकान के तीन और हिस्सेदार सामने आ गए। जिन्होंने नोटिस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। मामले में ऐसा पेच फंसा कि ईओ ने मकान गिराने से हाथ खड़े कर दिए। किरकिरी से नाराज डीएम ने ईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति कर दी थी। तभी से इस मामले में कार्रवाई रुकी हुई थी।
जीयनपुर नगर पंचायत में आजमगढ़-गोरखपुर मार्ग के पूरब पटरी पर कुंटू सिंह की पत्नी के नाम 52 लाख से ज्यादा के117 वर्ग मीटर में बने तीन मंजिला मकान और अजमतगढ़ रोड पर 59.13 वर्ग मीटर बने चार लाख से ज्यादा के मकान को जब्त दिखाया गया था। उक्त मकानों के साथ जब्त होने के बाद नगर पंचायत जीयनपुर ने इन्हें गिराने के लिए पांच नवंबर को नोटिस चस्पा कर दिया।
आरोप था कि ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू और उनकी पत्नी वंदना सिंह के नाम से कोई नक्शा नगर पंचायत से पास ही नहीं कराया गया है। मकान व दुकान जब्त होने के 15 दिन बाद मकान के ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया गया था।
नोटिस चस्पा होते ही मकान के तीन और हिस्सेदार सामने आ गए थे। सलीम पुत्र कलीम, रईस पुत्र स्व. नसीम, मो. आजम पुत्र अलीम ने पालिका और जिला प्रशासन को बताया कि हम तीनों पट्टीदार हैं। हमने अपना हिस्सा किसी को नहीं बेचा है।
हमारे एक पट्टीदार वसीम ने सिर्फ एक चौथाई हिस्सा वंदना सिंह को बेचा है। साथ ही पूरे मकान का नक्शा वर्ष 2001 में ही स्वीकृत है। इसके साथ ही प्रभावित पार्टी हाईकोर्ट भी चली गई। हालांकि हाईकोर्ट ने सक्षम अपीलीय अधिकारी के यहां अपील करने का आदेश देते हुए इसे खारिज कर दिया।
किरकिरी के बाद की गई कार्रवाई की संस्तुति
जिस मकान को ईओ जीयनपुर अखिलेश कुमार ने बिना नक्शा पास हुए बना दिखाते हुए नोटिस चस्पा की बाद में उसी मकान का नक्शा पास बताते हुए गिराने से हाथ खड़े कर दिए। इसके साथ ही नोटिस के सापेक्ष जो प्रत्यावेदन दाखिल हुए थे उसका निस्तारण किए बिना गायब भी हो गए।
जबकि विकास प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2001 में पास हुए नक्शे सापेक्ष निर्माण में कई चीजें गलत बताई गई थी। नक्शे के विपरीत बेसमेंट और कुछ बढ़कर निर्माण कराया गया था। इससे नाराज जिलाधिकारी ने लापरवाह ईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए संस्तुति शासन से की है।