निचली अदालत से मिली सजा को आरिज खान ने दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरिज को दोषी माना लेकिन गुरुवार को सुनाए गए फैसले में निचली अदालत के फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। हाईकोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले से परिजनों को आशा की किरण नजर आई है। लेकिन वह इस मामले में कुछ कह नहीं रहे हैं। मुहल्ले में भी इस बात को लेकर कोई विशेष हलचल देखने को नहीं मिली।
बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए इसकी न्यायिक जांच की मांग को देकर लगातार धरना प्रदर्शन करने वाले उलेमा कौंसिल के प्रवक्ता तलहा रशादी ने कहा कि जितने बच्चों को फंसाया गया है वे बेगुनाह हैं। कांग्रेस के एक मंत्री को बलि का बकरा चाहिए था। उन्होंने आजमगढ़ के पढ़ने लिखने वाले बेगुनाह नौजवानों को बलि का बकरा बनाया। हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है उससे यह उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय जरूर मिलेगा। जनपद के बेगुनाह बच्चे जयपुर की तरह बाइज्जत बरी होंगे।