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पूर्वांचल का नूर बनकर उभरा है आजमगढ़ का पुस्तक मेला : राजभर

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आजमगढ़। हरिऔध कला केंद्र में चल रहे 25वें आजमगढ़ पुस्तक मेले का मंगलवार को समापन हो गया। पुस्तक मेले का कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने अवलोकन किया। सुबह के सत्र में औरत की दुनिया विषय पर विमर्श का आयोजन किया गया।
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कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि यह पुस्तक मेला पूर्वांचल का नूर बनकर उभरा है। डीएम नवनीत सिंह चहल ने सभी छात्रों व अतिथियों को किताबें भेट करते हुए कहा कि आजमगढ़ साहित्य का गढ़ है। इस बार 50 से अधिक प्रकाशकों की उपस्थिति ने इस पुस्तक मेले को राष्ट्रीय पटल पर दर्ज किया है। सीडीओ परीक्षित खटाना ने कहा कि अच्छी किताबें एक अच्छा मनुष्य बनाती हैं। एसडीएम देवरिया दिशा ने कहा कि किताबें जीवन में सफलता की कुंजी हैं। एडीम वित्त एवं राजस्व आजाद भगत ने कहा कि पुस्तक मेले में ठहराव नहीं आने देंगे। यह प्रवाह अगले वर्षाें में भी जारी रहेगा। डॉक्टर इंतियाज अहमद, संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन, राकेश राय, विकल्प रंजन ने भी विचार व्यक्त किए।
सांध्यकालीन सत्र में मुशायरे का आयोजन
सांध्यकालीन सत्र में डॉ. इंतियाज राष्ट्रीय उर्दू प्रमोशन काउंसिल के संयोजन में मुशायरे का आयोजन किया गया। नुसरत अतीक गोरखपुरी ने, हौसला गर बुलंद हो तो फिर एक दिया आंधियों पर भारी है सुनया। सालिम सलीम ने, बहुत मरने की ख्वाइश हो रही थी, सो मरने का इरादा कर लिया है सुनाया तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा सभागार गूंजता रहा। वहीं, मनीष शुक्ला ने, हमारी जान के दुश्मन ने, हमने और रब ने, हमारी चीख सुनी, सिर्फ तीन लोगों ने सुनाया। डाॅ. सरफराज नवाज ने, कहा कि मैं राबतें नहीं रिश्ते बनाया करता था, इसीलिए तो सदा चोट खाया करता था। भालचंद त्रिपाठी ने, तुम सलीके से कह गये होत, हम भी हर बात सह गये होते सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
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