आजमगढ़। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को उनके घर पर काम उपलब्ध कराने सरकार के निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन की ओर से 1688 ग्राम पंचायतों में काम शुरू करा दिया गया है। वर्तमान जहां 68099 श्रमिकों को काम दिया गया है, वहीं उनका 3.40 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया है। श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने की संख्या के आधार पर आजमगढ़ जनपद में सूबे में टॉप-3 पर है। इससे आगे बहुत कम अंतरों से लखीमपुर खीरी और बदायूं हैं।
जिलाधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि गरीबों को गांव स्तर पर ही मनरेगा के तहत काम शुरू कराने के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे। जनपद में बाहर से लगातार आ रहे श्रमिक वर्ग के लोगों को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना था, ताकि सभी की अजीविका चल सके। मनरेगा के तहत जनपद में लाकडाउन के दौरान छूट मिलने के बाद 7.35 लाख मानव दिवस के सृजन की डिमांड जनरेट की गई है। इसके सापेक्ष अभी वर्तमान में 68099 श्रमिक काम कर रहे हैं। इनका भुगतान भी शुरू कर दिया गया है। श्रमिकों की संख्या के आधार पर जनपद सूबे में टॉप-3 पर है। इसके साथ ही जनपद में शेष 183 ग्राम पंचायतों में भी मनरेगा के तहत कार्य शुरू कराने के लिए बीडीओ, एपीओ और सचिवों को इसके लिए नोटिस जारी की गई है।
डीएम एनपी सिंह ने बताया कि जनपद में बाहर से आए श्रमिकों का भी जाबकार्ड बना उन्हें काम दिलाया जा रहा है। अबी तक 3125 प्रवासी श्रमिकों का जाबकार्ड बनाया जा चुका है। इसमें 3110 ने काम भी शुरू कर दिया है। अन्य श्रमिकों का भी जाबकार्ड बनाया जाएगा।
एनआरएलएम की 10 हजार महिलाएं भी जुड़ी
मनरेगा के इस काम में पुरुषों के साथ महिलाएं भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। राष्ट्रीय अजीविका मिशन के तहत विभिन्न समूहों से जुड़ी 10 हजार दीदीयों को भी मनरेगा के तहत काम दिलाया गया है। इससे उनको काफी लाभ मिल रहा है।
जनपद के 1684 गांवों में शुरू हुआ मनरेगा का कार्य, 10 दिन में पांच लाख मानव दिवस का हुआ सृजन शासन के निर्देश पर लाक डाउन के बीच गांवों में मनरेगा के कार्य शुरू हो चुके हैं। अब तक जनपद के 1684 गांवों में मनरेगा के तहत काम शुरू हो चुका है। विगत 10 दिनों में 66500 मजदूर काम कर रहे हैं। अब तक कुल लगभग पांच लाख मानव दिवस का सृजन भी हो चुका है।