आजमगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान का संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। साथ ही अत्मनिर्भर बनकर समाज के सामने एक मिशाल पेश कर रही हैं। जनपद में संचालित 2168 कोटे की दुकान में कुल 56 समूह की महिलाओं की भागीदारी है। जबकि 20 दुकानों पर अभी महिलाओं का चयन करने की तैयारी चल रही है। बाकी के 2112 कोटे की दुकानों का संचालन अभी भी पुरुष वर्ग कर रहे हैं। धीरे-धीरे आधी आबादी आत्मनिर्भर बन रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में 16 हजार 800 स्वयं सहायता समूह में करीब एक लाख 72 हजार महिलाएं सम्मिलित हैं। वहीं जनपद में कुल 2168 सार्वजनिक वितरण प्रणाली कोटे की दुकानें हैं। करीब सात दुकानें अभी खाली है। 2168 कोटे की दुकानों में से 56 कोटे की दुकानें समूह की महिलाओं को आवंटित किया गया है। डीसी एनआरएलएम मिथिलेश तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अब सरकारी कोटा चलाने का मौका मिला है। नई राशन की दुकानों के आवंटन में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वरीयता दी जा रही है। समूह के एक सदस्य को उचित दर की दुकान के संचालन का जिम्मा दिया जा रहा है। जिले में अब तक समूह की 56 महिलाओं को कोटा संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। अब वह धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने बताया कि जितने नए कोटे की दुकानें आवंटन किए जाएंगे उसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वरियता दी जाएगी।
विकास खंड अहरौला के खालिसपुर ग्राम सभा में कोटा का संचालन राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत समूह की महिला अनीता देवी को आवंटित किया गया। लगभग एक साल से समूह के माध्यम से वह कोटा चला रही हैं। जिससे वह न केवल आत्मनिर्भर बन रही बल्कि अपने परिवार को भी संभाल रही हैं। उनकी समूह में कुल 13 महिलाएं शामिल हैं जो आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना सराहनीय है।
विकासखंड लालगंज के गंगापुर गोगही में आदर्श आजीविका स्वयं सहायता समूह द्वारा कोटे की दुकान संचालित की जा रही है। समूह की अध्यक्ष सुनीता यादव कोटे का संचालन कर रही हैं। जिससे उनको और उनके समूह की महिलाओं को काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि समूह की एक सदस्य महिला की जमीन बंधक थी। जिसे एक लाख रुपये दिया गया। वहीं एक सदस्य की बेटी की शादी में 60 हजार रुपये दिए गए। एक सदस्य का घर बन रहा था पैसे की कमी थी जिसे पैसा दिया गया। जिससे वह अपने घर बना रही है। उन्होंने बताया कि तीन मार्च को कोटे की दुकान मिली है।