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अमर उजाला शिक्षा अभियान : कोरोना काल में ग्रामीण बच्चों के लिए मोहल्ला पाठशाला बना वरदान

Sun, 27 Mar 2022 03:38 PM IST
सुशील कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आजमगढ़

सार

बच्चों की पढ़ाई बाधित होने पर विकल्प के रूप में सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की, लेकिन बिना स्मार्ट फोन वाले बच्चे इसका लाभ नहीं उठा सके। पढ़ाई से वंचित बच्चों के लिए मोहल्ला क्लास शुरू होना किसी वरदान से कम नहीं था।
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अमर उजाला अभियान शिक्षा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित गरीब बच्चों के लिए कोरोना काल में शिक्षा विभाग का मोहल्ला क्लास काफी मददगार साबित हुआ है। लगभग डेढ़ साल से स्कूल बंद रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई से मन पूरी तरह उचट गया था। मोहल्ला क्लास से लंबी गैप के बाद बच्चे शिक्षा से जुड़ने लगे। बच्चे के माता पिता भी मोहल्ला क्लास लगाने में शिक्षकों की मदद करते रहे।

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बच्चों की पढ़ाई बाधित होने पर विकल्प के रूप में सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की, लेकिन बिना स्मार्ट फोन वाले बच्चे इसका लाभ नहीं उठा सके। पढ़ाई से वंचित बच्चों के लिए मोहल्ला क्लास शुरू होना किसी वरदान से कम नहीं था। हर गांव में ऐसे बच्चे अपने घर के समीप ही शिक्षा ग्रहण कर पा रहे थे। पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को उनके मोहल्ले में हीं जाकर गुरुजी रोज दो से तीन घंटा पढ़ा रहे थें। ग्रामीण स्तर पर मोहल्ला पाठशाला के लिए ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की मदद भी ली गई थी।

घर बैठे मिलती रही बच्चों को शिक्षा
वैश्विक महामारी में स्कूलों के माध्यम से मोहल्ला कक्षाएं चलाई जा रही थीं। यह घर में ऊब रहे बच्चों के लिए काफी कारगर साबित हुई। मोहल्ला कक्षा के जरिए नौनिहालों को घर बैठे शिक्षा दी जा रही थी। स्कूलों में शिक्षकों की एक टीम गठित कर इस योजना को फलीभूत किया गया। समय-समय पर इसकी मानीटरिंग भी होती रही। - रश्मि मौर्या, शिक्षक।
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शारीरिक दूरी का रखा गया ख्याल
नौनिहालों को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए मोहल्ला क्लास में शिक्षकों द्वारा शारीरिक दूरी के अनुसार बैठाया जाता था। मोहल्ला क्लास के लिए खुली जगह का चयन कर बच्चों को पढ़ाया गया। ताकि बच्चे सुरक्षित रहें और अपनी शिक्षा ग्रहण कर सकें। - प्रिया राय, शिक्षक।

अभिभावकों की सहमति से क्लास हुए संचालन
गांव में मोहल्ला क्लास का संचालन अभिभावकों की सहमति से किया जा रहा था। बच्चों को मोहल्ला क्लास में बैठने से पहले उनके अभिभावकों से सहमति ली जा रही थी। मोहल्ला क्लास में अभिभावकों और युवाओं का भी शिक्षकों को सहयोग मिलता रहा। अभिभावक भी शिक्षकों के इस पहल की सराहना करते हुए अपने बच्चे को मोहल्ला क्लास भेजते रहे।- अभिमन्यु यादव, शिक्षक।

कोरोना के कारण स्कूल बंद हो गए थे। जिससे शिक्षा पूरी तरह से प्रभावित हो गई थी। बच्चे शिक्षा से दूर होते जा रहे थे। इस दूरी को कम करने के लिए तभी मोहल्ला पाठशाला की शुरूआत की गई। जितना मेहनत हम करते थे। उतना ही मेहनत अभिभावक भी करते थे। - भवानी शंकर सिंह, शिक्षक।

स्कूल खुलने तक बच्चों को मोहल्ला पाठशाला के जरिए शिक्षा से जोड़ने का काम किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया कि उनकी पढ़ाई पिछड़ने न पाए और बच्चे पढ़ाई-लिखाई न भूलें। समय-समय पर इसका निरीक्षण भी किया जाता रहा है। - अतुल कुमार सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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