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हवा-हवाई तैयारी, फिर भी तीसरी लहर से मुकाबले का दावा-- अब तक बच्चो के लिए मात्र ढाई सौ बेड ही हो सके है आर

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आजमगढ़। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जिला मुक्त हो चुका है तो वहीं अब तीसरी लहर के अगस्त के दूसरे अथवा तीसरे सप्ताह में आने की संभावना भी जतायी जा रही है। तीसरी लहर से निपटने की तैयारी तो जिले में चल रही है लेकिन हवा-हवाई कवायद के चलते अब तक की तैयारी नाकाफी ही बतायी जा रही है। यह अलग बात है कि स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि वह किसी भी हालात से निपटने को पूरी तरह तैयार है।
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर खास तौर से बच्चों के लिए खतरनाक बतायी जा रही है। ऐसे में शासन-प्रशासन का फोकस बच्चों के इलाज के लिए समुचित इंतजाम पर ही है। शासन के निर्देश पर स्थानीय स्वास्थ्य महकमे ने सात सरकारी अस्पतालों पर पीआईसीयू यूनिट के नाम पर ढाई सौ बेड आरक्षित कर लिए है। इन बेडों पर बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। सभी बेडों को आक्सीजन पाइप लाइन आदि से जोड़ने की कवायद अंतिम दौर में चल रही है। जिले में बच्चों की संख्या के सापेक्ष जितने बेडों का इंतजाम किया गया है वह नाकाफी है। वहीं दूसरी लहर में आक्सीजन की किल्लत भी सामने आई थी, जिसके चलते काफी संख्या में कोरोना संक्रमितों को अपनी जान तक गवानी पड़ी थी। सरकार इसके लिए भी तैयारी कर रही है। जिले केे सात आक्सीजन प्लांट की सौगात शासन द्वारा दी गई है लेकिन इसमें मात्र तीन की ही अब तक शुरूआत हो सकी है। तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक है। ऐसे में जिले में तैनात बच्चों के डॉक्टरों की बात की जाए तो इनकी भी भारी किल्लत है। जिले में सरकारी रिकार्ड के अनुसार 70 हजार बच्चों पर मात्र एक डॉक्टर की ही व्यवस्था है। स्वास्थ्य महकमे के सभी तैयारियों का आकलन करने के बाद अब तक हुई व्यवस्था को नाकाफी ही कहा जा सकता है। वहीं स्वास्थ्य विभाग हर स्थिति से निपटने का दावा कर रहा है।
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