तहसील क्षेत्र में किसानों के खतौनियों का अंश निर्धारण किया गया जिसमें काफी त्रुटियां हैं। लेखपालों द्वारा बिना सर्वे किए बिना जानकारी के ही अंश निर्धारण कर दिया गया। जिससे पीड़ित किसान तहसील का चक्कर काट रहे हैं।
रियल टाइम खतौनी के जरिए भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल किया गया है जिससे भूमि विवाद और धोखाधड़ी को कम किया जा सके। हालांकि, लेखपालों द्वारा हिस्सा निर्धारण में की गई गलतियों से किसानों को परेशानी हो रही है। किसान तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान अब भी बाकी है।
बता दें कि इस गलती के कारण हालत यह हैं कि जिन किसानों के पास एक कड़ी जमीन है उनके पास 100 कड़ी और जिनके पास 100 कड़ी जमीन है उनकी आधी हो गई है। जिसको सुधारने के लिए किसान आए दिन तहसील का चक्कर लगा रहे हैं।
अंश निर्धारण खतौनी में लेखपालों द्वारा बिना जानकारी लिए ही खतौनी का निर्धारण कर दिया गया। जिसके चलते काफी अनियमितता देखने को मिल रही है। - सूर्य प्रकाश यादव, बसावन पट्टी।
यह समस्या मेरी ही नहीं सैकड़ों किसानों की है। आए दिन तहसील का चक्कर काटते हैं। समस्या का हल नहीं निकल रहा है। - रामविनय, तोनारी।
इस समस्या का निदान बिना शिविर लगाए नहीं हो सकता है। क्योंकि हर गांव में किसानों की यही समस्या है।
-बलराम यादव, मनियारपुर।
लेखपाल द्वारा मनमाने तरीके से किसानों का निर्धारण कर दिया गया जो पूरी तरह से न्याय संगत नहीं है। शिकायत के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। -योगेंद्र यादव, मनियर।
वर्जन
80 प्रतिशत खतौनी का अंश निर्धारण कर दिया गया है। शेष खतौनी का अंश निर्धारण का काम चल रहा है। जिस भी किसानों के खतौनियों में कमी है उसे कोर्ट के माध्यम से ठीक किया जा रहा है। - अरुण कुमार वर्मा, तहसीलदार।