आजमगढ़। आज के दौर में पिस्टल और रिवाल्वर का क्रेज तो बढ़ा, मगर पुराने समय की स्टेटस सिंबल बंदूक से लोगों का ऐसा मोहभंग हुआ कि रखने से भी कतरा रहे हैं।
नवीनीकरण की बढ़ी फीस, वारिसान लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया और अन्य दिक्कतें भी मोहभंग में शामिल हैं। हाल यह है कि शस्त्र धारकों ने बंदूक गन हाउस पर जमा की फिर वापस नहीं ले गए। 15 से 20 हजार रुपये में खरीदी बंदूक का किराया 35 से 40 हजार से अधिक हो चुका है।
एक समय था जब बंदूक का क्रेज था। समय बीता और जिनके नाम पर बंदूक थी वह या तो मर या फिर किसी ने उसे चुनाव आदि में गन हाउस में जमा करा दिया। इनमें से कुछ लोग तो बंदूक दोबारा ले गए लेकिन बहुत से लोग दोबारा पलटकर नहीं आए। इसका परिणाम है कि गन हाउसों में सैकड़ों बंदूकें पड़ी जंग खा रही है।
हालात यह है कि कई बंदूकें 20 से 22 साल पहले दुकान में जमा की गईं। एक-एक गन हाउस का बंदूक मालिकों पर लगभग 30 से 40 लाख रुपये बकाया है। एक साल का एक बंदूक का किराया 24 साै रुपये से 36 साै रुपये है।
यह गन हाउस संचालकों और गन रखने वालों के बीच का मामला है। वह बंदूक जमा करते हैं और उनका किराया वसूलते हैं। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। - राहुल विश्वकर्मा, एडीएम प्रशासन और प्रभारी अधिकारी शस्त्र।