लाटघाट। सगड़ी तहसील अंतर्गत इलाकों में घाघरा का जलस्तर घटते ही बाढ़ से घिरे गांवों में संक्रामक बीमारियों ने कहर ढाना शुरू कर दिया है। दूषित पानी से देवारा अचल नगर में कई लोग बीमार पड़े हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची। जबकि गांव में ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की गोली वितरण करने की जरूरत है। इस बीच नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे उतरते ही जिला प्रशासन ने सभी नावों को हटा दिया है। अब मात्र चक्की गांव की दो हजार आबादी ही बाढ़ से घिरी है।
घाघरा नदी के जलस्तर में शुक्रवार को तीन से नौ सेमी. घटाव दर्ज किया गया। अब नदी बदरहुआ गेज पर खतरे के निशान 71.68 मीटर से नौ सेमी. नीचे बह रही है। जबकि डिघिया गेज पर खतरे के निशान 70.40 मीटर से मात्र नौ सेमी. ऊपर रह गई है। जलस्तर में कमी आने से महुला-गढ़वाल बांध के उत्तर बसे लगभग सभी गांव बाढ़ मुक्त हो गए हैं। मात्र नदी का तटवर्ती चक्की गांव ही बाढ़ से घिरा है। इधर, महीने भर से अधिक समय से बाढ़ से ज्वार, बाजरा, मक्का, गन्ना, धान की फसलों के बर्बाद हो जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। जिससे पशुपालकों का दुग्ध व्यवसाय चौपट हो रहा है।
बाढ़ से मुक्त हुए गांवों में जगह-जगह बाढ़ का पानी लगने से दुर्गंध उठ रही है। कुओं के साथ हैंडपंपों का जल दूषित हो गया है। सड़ांध के बीच रह रहे ग्रामीणों में दूषित जल पीने से उमस भरी गरमी में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। देवारा अचल नगर की स्थिति सबसे भयावह है, जहां राजेश, दिनेश, सुभावती, प्रेम, शीला, संतोष, बृजभान, सुभागी सहित दर्जन भर लोग मौसमी बुखार, खांसी से परेशान हैं। ग्राम प्रधान महेश यादव ने बताया कि सूचना दिए जाने के बाद भी गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची, जिससे पूरे गांव में जबरदस्त असंतोष है। हरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी गोपाल प्रसाद ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में भेजी जाएगी।