आजमगढ़। जिले में सरकारी अस्पताल हों या निजी, किसी में आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यही हाल होटलों का भी है। दो- तीन होटलों को छोड़ दें तो सभी में लोगों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। अगर चेते नहीं तो यहां भी होटल, अस्पतालों में कोलकाता के फालपट्टी मछुआ इलाके जैसी घटना हो सकती है। जहां 15 लोगों की जलकर मौत हो गई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी के मुताबिक, जिले में सरकारी, गैर सरकारी 60 अस्पतालों और 36 होटलों को मानक के अनुसार फायर फाइटिंग के उपकरण लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में पड़े पैमाने पर निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। वहीं, मंडलीय जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के अलावा 29 सीएचसी और 70 पीएचसी हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन हजारों लोग अपना इलाज कराने पहुंचते हैं साथ ही बड़े पैमाने पर अस्पतालों में मरीज भी भर्ती है। आपात कालीन स्थिति पैदा हुई तो मरीजों की जिंदगी दांव पर लगनी तय है, क्योंकि लटक रहे सिलेंडरों के प्रयोग तक को कर्मचारी प्रशिक्षित नहीं हैं।
इसके अलावा देखा जाए तो जिले में चार दर्जन से आधिक छोटे-बड़े होटल हैं। सुविधा देने के नाम पर यह ग्राहकों से लाखों रुपये कमा रहे हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं जबकि अग्निशमन विभाग फायर फाइटिंग के मानकों को पूरा करने के लिए 36 होटलों को नोटिस भी भेज चुका है। होटल संचालकों की लापरवाही से यहां भी कोलकाता के फालपट्टी मछुआ इलाके जैसी घटना हो सकती है। कहीं भी मानक के अनुसार आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं। पड़ताल के दौरान स्वास्थ्य केंद्र अतरौलिया, अहरौला, महाराजगंज, बरदह, पल्हनी, सठियांव में आग से बचाव के इंतजाम नहीं मिले। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में आग से बचाव का काम पूरा नहीं हुआ है।
मेडिकल कॉलेज में काम नहीं करते उपकरण
चक्रपानपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर में फायर फाइटिंग के उपकरण लगे है, लेकिन फायर कंट्रोल पैनल की स्क्रीन पर कोई लाइट नहीं जलती है। सभी पैनल 2015 के लगे हुए हैं जो खराब से पड़े हुए हैं। पुराने सिलिंडरों पर नए एक्सपायरी डेट लगा कर रख दिया गया है। पड़ताल में मेडिकल कॉलेज में अग्नि संयंत्र के साथ ओवर हेड नोजल नहीं लगे मिले। आग को बुझाने के लिए लगे प्रमुख पाइप कई जगह टूटी है। आग को बुझाने से संबंधित सारी व्यवस्थाएं भगवान भरोसे है। प्रधानाचार्य डॉ. वीके राव ने बताया कि एनओसी 2015 में मिली थी। अभी अस्पताल में ओवर हेड स्प्रिंकल नहीं लगे हैं। शासन से बजट मिलाने पर ये सारे कम पूरे कर लिए जाएंगे। संवाद
समय- समय पर होटल, अस्पतालों में कर्मचारियों को आग से बचाव के प्रशिक्षण दिए जाते हैं लेकिन अस्पताल, होटलों में मानक के अनुसार फायर फाइटिंग के व्यवस्था नहीं है। सरकारी, गैर सरकारी 60 अस्पतालों और 36 होटलों को मानक के अनुसार फायर फाइटिंग के उपकरण लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। कुछ अस्पतालों में आग से बचाव के उपकरण लगाने का काम चल रहा है। - वीके शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।