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लगातार दूसरे दिन बढ़ा घाघरा का जल स्तर, 10 बीघे जमीन कटी

Sun, 29 Jul 2018 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूराे
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बाढ़
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लाटघाट। लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 24 घंटे में घाघरा नदी का जलस्तर बदरहुआ नाले पर छह सेंटीमीटर और डिघिया नाले पर एक सेंटीमीटर बढ़ा है। शनिवार को भी लगभग 10 बीघे जमीन घाघरा नदी में समा गई।
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शुक्रवार को सेमरी में 14 लोगों को आशियाने घाघरा नदी में समा गए थे। अमर उजाला की ओर से मुद्धा उठाने के बाद एसडीएम शनिवार को सेमरी गांव पहुंचे और निरीक्षण किया। ग्रामीणों को अविलंब बंधे पर विस्थापित कर राशन आदि का लाभ देने के निर्देश दिए।


घाघरा नदी का जल स्तर बदरहुआ नाले पर शुक्रवार को 70.93 मीटर था जो शनिवार को 70.99 मीटर हो गया। डिघिया नाले पर 69.09 से बढ़कर 69.10 मीटर हो गया। सगड़ी तहसील के देवरांचल वासियों पर घाघरा ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया है। नदी के दूसरे सिरे पर बसे आराजी सेमरी गांव के 14 आशियानों को शुक्रवार को घाघरा नदी ने अपने आगोश में ले लिया था।
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तेजी से हो रहे कटान को देख ग्रामीणों में दहशत है। किनारे बसे गांवों के लोग सहमे हुए हैं। जिनके आशियाने बह चुके हैं वो सामान समेटकर बंधों पर जाने लगे हैं। नदी अब तक आराजी सेमरी की 100 बीघा कृषि योग्य भूमि को काट चुकी है। शनिवार को भी लगभग 10 भीघे जमीन घाघरा में समा गई। बचे लोगों को डर सता रहा है कि कब घाघरा उनके आशियाने को उजाड़ देगी। बाढ़ खंड के अधिकारी अभी तक गांव नहीं पहुंचे हैं।


गोरखपुर बार्डर पर बसे गांव के प्रधान अवधेश ने बताया कि गांव उपेक्षित रहा है। गांव की दो हिस्सा जमीन पर आबादी गत वर्ष से कटकर घाघरा नदी में समाहित हो चुकी है। पिछले साल करीब 36-38 लोगों का घर घाघरा नदी में विलीन हो गया था। एसडीएम सगड़ी पंकज श्रीवास्तव ने सेमरी गांव का निरीक्षण किया। लेखपाल-कानूनगो को कहा कि अविलंब इन्हें विस्थापित करा राशन आदि और मुआवजे का लाभ दिलाया जाए।

नाव के अभाव में जान जोखिम में डाल रहे बच्चे
लाटघाट। घाघरा का जलस्तर बढ़ते नालों में पानी उफान पर है। जमुवारी बाढ़ चौकी के पास महुला-गढ़वल बांध से अजगरा मगरबी के संपर्क मार्ग के बीच में एक नाला है जो उफनाया हुआ है। नाले पर बना पुराना बांस का चह टूट चुका है।


इससे होकर स्कूली बच्चे और ग्रामीण आ-जा रहे हैं। आना-जाना खतरे से खाली नहीं है। किसी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। अराजी अजगरा मगरबी, झंनझधपुर, झगरहवा सहित दर्जनों गांव के बच्चे रौनापार स्थित स्कूलों में पढ़ने आते हैं। इनके लिए यही एकमात्र रास्ता है। नाव के न होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बच्चे जान जोखिम में डालकर जा रहे हैं।

प्राथमिक विद्यालय बनी पोखरी
लाटघाट। शिक्षा क्षेत्र हरैया का प्राथमिक विद्यालय बघरवा में पानी जमा होने से परेशानी बढ़ गई है। स्कूल 31 बच्चे नामांकित हैं। शनिवार को कुल पांच बच्चे उपस्थित रहे। प्रधानाध्यापक सहित चार सहायक अध्यापक हैं। एक शिक्षामित्र है। प्राथमिक विद्यालय प्रांगण में पानी भरा है।


प्रधानाध्यापक मनोज कुमार विद्यालय पर नहीं थे। सहायक अध्यापक शिव कुमार सिंह, मुमताज, इंद्रबहादुर और शिक्षामित्र सरिता सिंह मौजूद थीं। अध्यापकों ने बताया कि पानी जमा होने से परेशानी हो रही है। खंड शिक्षा अधिकारी हरैया राजेश कुमार ने कहा कि ग्राम प्रधान नागेंद्र पटेल को कहा गया है कि विद्यालय परिसर में मिट्टी डाल दें। ग्राम प्रधान नागेंद्र पटेल ने बताया कि ऊपर से रोक लगी है। बीडीओ कहें तो मिट्टी पड़ सकती है।

नाविकों ने कहा, नहीं चलाएंगे नाव
लाटघाट। देवारा क्षेत्र में बाढ़ के समय संपर्क मार्ग डूबे होने पर स्थानीय नागरिकों की ओर से नाव संचालित किया जाता है। सोनौरा और मानिकपुर में पिछली बार चलाई गई नाव का पैसा अभी तक नहीं मिला। इजिससे नाविकों ने कहा कि इस बार नहीं नाव चलाएंगे।


बेचू निषाद पुत्र फूलबदन निषाद निवासी मानिकपुर सोनौरा ने बताया कि जुलाई से सितंबर तक हमने नाव का संचालन किया। लेखपाल मुंशी यादव की ओर से गलत सूचना दी गई। पांच-छह दिन ही नाव चलाए जाने की बात कही जा रही है। अभी तक पैसे का भुगतान नहीं हुआ।
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