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दिन में कुछ राहत, रात में जारी है सड़क पर कब्जा

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आजमगढ़। तीन साल से दुश्वारियां झेल रहे रोडवेज क्षेत्र के लोगों की समस्याएं अभी खत्म नहीं हुई है। धरना-प्रदर्शन, आंदोलन के बाद दिन में हालत कुछ ठीक हैं पर रात में अभी भी तिराहे और सड़क पर रोडवेज बसों का कब्जा है। रातभर प्रेशर हार्न से और जाम परेशानी का सबब बना हुआ है। इतना ही नहीं रोडवेज कर्मचारी ही डग्गामार वाहनों को भरवाने की कवायद भी कर रहे है।
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आजमगढ़ रोडवेज को मॉडल रोडवेज में तब्दील करने की कवायद शुरू हुई थी। इसकी वजह से रोडवेज बसों का परिचालन सड़क से ही हो रहा
था ।तीन साल से सड़क पर से रोडवेज का संचालन होने से स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया। कुछ दिनों पूर्व लोगों ने धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर विरोध दर्ज कराया। परिणाम ये हुआ कि अब दिन में तो सड़क पर रोडवेज बसें नहीं खड़ी हो रही है। लेकिन शाम सात बजते ही वही हाल हो जाता है । हर रूट की बसें सड़क पर ही आड़ा तिरछा खड़ी होकर सवारियां लादना शुरू कर देती हैं। रात में रोडवेज बसों के झुंड के बीच डग्गामार वाहन भी पहुंचते है, जिसे रोडवेज के कर्मचारी ही अपनी बसों को को खराब बता कर सवारियों को भेज कर भरवा देते है और चंद मिनटों में ही रोडवेज के सवारियों को लेकर डग्गामार वाहन गंतव्य की ओर रवाना हो जाते है।

रोडवेज बसों से हो रही जम कर माल ढुलाई
आजमगढ़। रोडवेज बसों की व्यवस्था सरकार ने सवारियों के लिए है, लेकिन वर्तमान में इससे माल की जम कर ढोया जा रहा है। आजमगढ़ रोडवेज परिसर में रात के वक्त प्रतिदिन लाखों का माल दिल्ली, लखनऊ आदि स्थानों से आता है। यहां सवारियों के सामान ढोने के लिए तैनात कुली बसों से उतने वाले इन्हीं बिना ई वे बिल और जीएसटी के आने वाले माल की ढोवाई करते है।
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नये भवन में यात्री सुविधाएं नदारद
आजमगढ़। रोडवेज का नया भवन बन चुका है, लेकिन अभी इसमें यात्री सुविधाएं नदारद है। यात्रियों को बसों की सूचना देने के लिए न तो कोई ध्वनि विस्तारक यंत्र की व्यवस्था है, न ही यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सी आदि ही लगवायी गई है। किस रूट की बस कहां खड़ी है इसकी जानकारी के लिए यात्री सड़क से लेकर रोडवेज परिसर में इधर से उधर भटकने को मजबूर है।
धर्मेंद्र नाथ सिंह यादव, आरएम, रोडवेज, आजमगढ़ ने कहा कि प्लेटफार्म बनाने की कवायद चल रही है। मिट्टी पाटी जा रही है, जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। अब रोडवेज की सभी बसों को परिसर में ही खड़ा कराया जा रहा है। रात में भी कोई बस सड़क पर नहीं खड़ी हो रही है। रोडवेज बसों से जो सामान बाहर से आ रहे है वो कोरियर सेवा के है। रोडवेज द्वारा अब कोरियर सेवा का भी संचालन किया जा रहा है। यात्री सुविधाओं की जहां तक बात है तो अभी कम चल रहा है थोड़ बहुत इंतेजाम हुए है और जो काम बचे है उसे कराया जा रहा है। कुछ दिनों में रोडवेज परिसर में यात्रियों को सभी जरूरी सेवाएं उपलब्ध हो जाएगी।

दिलीप राय, स्थानीय निवासी ने कहा कि लाख प्रयास के बाद रोडवेज प्रशासन की कवायद में कुछ ही सुधार आया है। शाम होते ही सड़क पर बसों का कब्जा होना शुरू हो जाता है जो पूरी रात रहता है। सड़क पर खड़े रोडवेज बसों के प्रेशर हार्न से सर्वाधिक परेशान कर रखा है। तीन साल से रातभर चैन से हम सो नहीं सके है।
राजकुमार शर्मा, स्थानीय निवासी ने कहा कि रोडवेज कर्मियों और पुलिस कर्मियों की मिली भगत से डग्गामार वाहनों में रोडवेज बसों से यात्रियों को बैठाया जा रहा है। रोडवेज बस चालक पहले अपने वाहन में सवारियों को बैठाते है। गाड़ी भरते ही डग्गामार वाहन आता है और चालक गाड़ी खराब बता सवारियों को उसमें शिफ्ट करा देते है।
अरूण बरनवाल, स्थानीय निवासी ने कहा कि रोडवेज परिसर में सिर्फ प्लेटफार्म बनाने का काम बचा हुआ है। उसके लिए दो माह पूर्व ही शासन से पैसा भी आ चुका है। रोडवेज प्रशासन काम जल्द पूरा कराने के बजाये हीलाहवाली कर रहा है। बरसात में परिसर में पानी भर जायेगा और फिर सड़क पर बसे खड़ी होने लगेंगी।
रविंद्र पांडेय, स्थानीय व्यवसायी ने कहा कि तीन साल से दुश्वरियां झेल रहे है हम। बहुत प्रयास के बाद तो जाकर दिन में कुछ राहत मिली है, लेकिन शाम होते ही रोडवेज के बस कुकुरमुत्ते की तरह चौराहे और सड़क पर जाम लगा कर खड़े हो जाते है। तेज आवाज के हार्न और जाम से तो अब दम ही घुटने लगा है।
हरिश्चंद्र मौर्या, मेडिकल हाल संचालक ने कहा कि अभी पूरी तरह से समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अभी भी रोडवेज के मनबढ़ कर्मचारी सड़क पर कब्जा कर बसों को खड़ा कर देते है और सवारियां लादने के लिए प्रेशर हार्न बजाते रहते है। सबसे बड़ी दिक्कत तो तब होती है जब एंबुलेंस को गुजरने के लिए भी ये रास्ता नहीं देते है।
रूद्र प्रताप अस्थाना, प्राइवेट कर्मचारी ने कहा कि रोडवेज की सारी दुव्र्यवस्था का जिम्मेदार रोडवेज के आरएम है। कई वर्षों से यहीं जमा है, जिसके चलते पूरी तरह से मनबढ़ई कर रहे है। स्थानीय लोगों की समस्या की इन्हें कोई चिंता नहीं है। इन्हीं की शह पर ही रोडवेज कर्मी सड़क पर कब्जा जमा कर सवारी लादते है।
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