आजमगढ़। वर्ष 2007 और 2008 में विशिष्ट बीटीसी में चयन के लिए जिले के 21 लोगों ने फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया। इसके बाद इसी प्रशिक्षण पर 13 ने नौकरी भी पा ली थी। 2010 में राज्यस्तरीय बोर्ड ने इनके विकलांग प्रमाण पत्र को फर्जी करार दिया था। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक ने डायट प्राचार्य को सूची जारी कर इन पर विधिक कार्रवाई को कहा था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पिछले दिनों जिलाधिकारी के आदेश पर जांच के लिए गठित कमेटी ने शनिवार को दो शिक्षकों की सेवा समाप्ति के लिए एफआईआर के लिए बीएसए को लिख दिया। इसके साथ ही चार अन्य प्रशिक्षुओं के सभी प्रमाण-पत्र रद करने और निर्गत मानदेय की रिकवरी की बात कही गई है।
मुलायम सिंह यादव की सरकार के समय बीएड डिग्री धारकों को छह माह के विशिष्ट बीटीसी कोर्स के बाद शिक्षक की नौकरी देने के नियम बने थे। वर्ष 2007-08 में प्रदेश के डायटों से ये कोर्स कराए गए। फर्जी विकलांग प्रमाण-पत्र बनवा कर लोगों ने कोर्स कर लिया और बाद में नौकरी भी पा ली। शिकायत के बाद प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय विकलांग कल्याण बोर्ड की ओर से 22 जनपदों के विकलांग प्रमाण-पत्र लगाने वाले 231 प्रशिक्षणार्थियों का जुलाई 2010 में फिर से परीक्षण और भौतिक सत्यापन किया गया। इसमें 72 प्रशिक्षुओं के प्रमाण-पत्र फर्जी मिले। अक्तूबर 2010 में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के तत्कालीन निदेशक अशोक गांगुली की ओर से आजमगढ़ डायट प्रिंसिपल को 21 शिक्षकों की सूची जारी की। सूची में शामिल फर्जी प्रशिक्षणार्थियों के ऊपर विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डायट मामले को दबा गया। मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा तो उन्होंने जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया। शनिवार को कमेटी की बैठक डायट कार्यालय में हुई। इसमें डायट प्राचार्य परमहंस सिहं यादव, एसीएमओ डॉ. परवेज अख्तर, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी विकास वर्मा आदि शामिल हुए। डायट प्राचार्य ने बताया कि सूची में शामिल 18 शिक्षकों का मामला राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक के यहां लंबित है। इन पर वहीं से कार्रवाई होनी है। फर्जी प्रमाण पत्र पर यहां इससे इतर दो शिक्षक नौकरी करते पाए गए हैं। इनकी सेवा समाप्ति और एफआईआर के लिए बीएसए को लिख दिया गया है। चार प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के बाद कहीं नौकरी नहीं की। इनके यहां से निर्गत सभी प्रमाण-पत्रों को रद करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक को लिखा जा रहा है। साथ ही इनसे छह माह को दौरान 2500 रुपये प्रति माह दिए गए मानदेय की भी रिकवरी की जाएगी। मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा रही है।
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ये मिले थे जिल में नौकरी करते
आजमगढ़। माधुरी सिंह, चंद्रशेखर सिंह, भारत लाल यादव, अजीत कुमार सिंह, रेखा सिंह, नंद किशोर यादव, शिव नारायण, राजेश कुमार, जय सिंह यादव, अखिलेश कुमार, राहुल यादव, राम सिंह प्रसाद और सीमा यादव।
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फर्जी विकलागंता सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी करने वाले दो शिक्षकों की सेवा समाप्ति और एफआईआर के लिए के लिए बीएसए को लिखा गया है। चार प्रशिक्षुओं के यहां से निर्गत प्रमाण-पत्र रद होंगे। इनसे मानदेय की रिकवरी भी की जाएगी।
परमहंस यादव, डायट प्रिंसिपल