आजमगढ़। देश की मंडियों को हाईटेक बनाने के लिए केंद्र सरकार ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) योजना शुरू की थी। इसके तहत पंजीकृत किसानों को एप और मोबाइल पर ऑनलाइन देश की मंडियों के भाव मिलने थे। आढ़तियों की ओर से चेक के माध्यम से किसानों को उसके उत्पादन का भुगतान करना था। मंडी परिषद की ओर से योजना का लाभ देने के लिए 60 हजार किसानों का पंजीकरण भी किया गया, लेकिन कम का उत्पाद बेचने वाले किसान योजना से किनारा कर रहे हैं।
योजना के तहत ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी कि एक और कंप्यूटर पर आढ़तियों और किसानों को देश की सभी मंडियों में उत्पादों का भाव एप के माध्यम से पता चल जाता था। एप पर गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर समेत किसी भी प्रदेश की मंडी का भाव आढ़ती देख सकते हैं। योजना के तहत सूबे की सभी मंडियों को इससे जोड़ा जा रहा है। एफ से आढतियों के साथ किसानों को भी फायदा होना था। सरकार को उम्मीद थी कि इसके माध्यम से किसानों को ई-बाजार मिल जाएगा, जिसमें किसान अपने उत्पाद की सही कीमत पा सकेंगे। मंडी परिषद ने कृषि विभाग से मिले सूची के आधार पर 60 हजार किसानों का पंजीकरण किया। योजना के तहत आढ़तियों को किसानों को सीधे रकम न देकर चेक देना था। यहीं किसानों को नहीं भा रही है। मंडी में स्थानीय उत्पाद के रूप में सिर्फ सब्जी बेचने वाले छोटे किसान आते हैं। दो हजार का व्यापार करने वाले किसानों का कहना है कि चेक को भुनाने के लिए बैंक में लाइन लगाएंगे या अपना काम देखेंगे। फिर भी मंडी परिषद की ओर से किसानों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए समझाया जा रहा है।
लैब में स्पष्ट होती है उत्पाद की क्वालिटी
योजना में मंडियों में किसानों के उत्पाद की जांच करने की व्यवस्था होती है। इसके लिए मंडी परिषद में प्रयोगशाला बनाई गई है। जांच के बाद किसानों को बता दिया जाता है कि उनका उत्पाद किस ग्रेड का है।
मंडी में सिर्फ हरी सब्जी वाले स्थानीय किसान ही अपना उत्पाद बेचने जाते हैं। दो-चार हजार का माल बेचने के लिए योजना के तहत चेक दे दिया जाता है। इसके लिए बैंक में लाइन लगानी पड़ती है। हम छोटे किसान हैं। अपना काम करेंगे कि बैंक में चेक भुनाने के लिए लाइन लगाएंगे।
अखिलानंद पांडेय, ब्रह्मपुर
चेक के तहत भुगतान होने में काफी परेशानी होती है। बैंक में लाइन लगानी पड़ती है। फिर कैश मिले नहीं मिले। हमारा उत्पाद भी कम मात्रा में होता है। दिन भर में एक-दो हजार का व्यापार होता है। इस योजना से छोटे किसानों को फायदा नहीं है।
रामाश्रय राय, जमसर
चेक से भुगतान होने के कारण छोटे किसान इसे पसंद नहीं कर रहे हैं। हालांकि उन्हें समझाया जा रहा है। अब तक 60 हजार किसान पंजीकृत किए जा चुके हैं। प्रयोगशाला में उत्पाद की क्वालिटी बताने की भी व्यवस्था है।
जेपी सिंह, मंडी सचिव