अदालत ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाए गए पिता को तीन वर्ष और उसके दो पुत्रों समेत एक अन्य को पांच-पांच वर्ष कैद के साथ जुर्माने की सजा सुनाई। मंगलवार को यह सजा अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार सिंह की अदालत ने सुनाई। घटना मेंहनगर थाना क्षेत्र के उसरी गांव की है।
उसरी गांव में दो दिसंबर 2005 को हुई मारपीट की घटना में घायल अनरसी की बीएचयू में उपचार के दौरान सात दिसंबर 2005 को मौत हो गई थी। घायल अनरसी के बयान पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। उसने पुलिस को बताया था कि घटना के दिन लगभग एक बजे अभियुक्त गुन्नू पुत्र नोहर अपने दो लड़के चंद्रशेखर और अनिल और दुक्खू पुत्र धनराज के साथ लाठी डंडा लेकर दरवाजे पर आए और जमीन बंटवारे की बात को लेकर मारपीट की। चोट लगने से अनरसी, उसका लड़का बाबू लाल, भतीजा राजेंद्र, मुन्नीलाल घायल हो गए। अपने पिता अनरसी के मृत होने की सूचना राजबहादुर ने थाने में दी थी। पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से इस केस की पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता सोरख यादव ने राजबहादुर, मुन्नीलाल, राजेंद्र, शैलेश सिंह, एसओ रमेश पांडेय, एसआई श्यामजीत यादव समेत कुल 11 गवाहों को अदालत में पेश किया और तर्कों को रखा। अदालत ने गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए गुन्नू को तीन वर्ष की कैद और पांच हजार रुपया जुर्माना, धारा 323 में तीन माह और पांच सौ रुपया अर्थदंड, दुक्खू, चंद्रशेखर और अनिल को धारा 304 में पांच वर्ष की सजा और 10 हजार रुपया जुर्माना और 323 में छह माह और एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।