आजमगढ़। आज नगरपालिका के पास कूड़े गिराने के लिए जमीन नहीं है। लेकिन एक समय था जब नगरपालिका के पास कूड़ा निस्तारण के लिए लगभग सात एकड़ जमीन थी। जहां पर पूरे शहर के कूड़े का निस्तारण होता था लेकिन नगरपालिका प्रशासन ने उक्त जमीन की बिक्री कर कॉलोनी का निर्माण करा दिया। आज उक्त स्थल पर एक भव्य कॉलोनी है। जिसमें ज्यादातर आवास शिक्षकों और शिक्षक नेताओं के हैं।
नगर के बिलरिया की चुंगी से कुछ दूरी पर स्थित हरिऔध नगर कालोनी की गिनती शहर की वीआईपी कॉलोनियों में होती थी। क्योंकि इस कॉलोनी में पूर्व शिक्षक नेता स्व. पंचानन राय का भी आवास है। लगभग 30 से 35 वर्ष पूर्व यह स्थान मैलखत्ता के नाम से जाना जाता था। यहां पर पूरे शहर से निकलने वाले कूड़े को नगरपालिका द्वारा फेंका जाता था। इस मार्ग से होकर श्रीनगर, सरैया, बिलरियागंज, रौनापार के लोगों का आवागमन होता है। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग नाक पर रूमाल रखकर गुजरते थे। लेकिन तत्कालीन पालिकाध्यक्ष ने उक्त जमीन पर कालोनी बनाने के लिए जमीन की बिक्री कर दी। शहर से सटे होने के कारण यह जमीन अनमोल थी। लेकिन एक नेता के दबाव में पालिकाध्यक्ष ने कौड़ियों के भाव जमीन बेच दी। सूत्रों की मानें तो 10 हजार रुपये बिस्वा की दर से जमीनों का आवंटन किया गया। लोगों ने किश्तों में पैसे भरे आज सभी लोग उक्त जमीनों के मालिक हैं और उस पर बड़े-बड़े भवन तैयार हो चुके हैं। मैल खत्ता की बिक्री करने के बाद नगरपालिका के पास कोई ऐसी भूमि नहीं थी जिस पर वह कूड़े का निस्तारण कर सके। जमीन के अभाव में नगरपालिका द्वारा कूड़े को तमसा नदी के तट पर फेंका जाने लगा। लगभग एक वर्ष पूर्व प्रशासन ने नगरपालिका को रानी की सराय विकास खंड के मझगावां में पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराई। जिसके रास्ते के लिए जमीन खरीदकर रास्ते का निर्माण भी कराया जा चुका है। इसके बाद भी नगर से निकलने वाले कूड़े को अभी तक बंधे के किनारे गिराने का सिलसिला जारी है। जबकि इस संबंध में जिलाधिकारी की ओर से कई बार नगरपालिका प्रशासन को निर्देशित किया जा चुका है।
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कूड़ा निस्तारण के लिए मझगावां में मिली जमीन तक जाने के लिए रास्ते को लेबल कर तैयार किया गया है। लेकिन उसके अगल-बगल किसानों के खेत हैं जब उनके द्वारा खेतों में पानी चलाया जाता है तो इस रास्ते पर गाड़ियों का आवागमन बाधित हो जाता है। इसलिए रास्ते को पक्का करने के लिए हम स्टीमेट तैयार कर रहे हैं। इसे शासन के पास भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद रास्ते का निर्माण करा दिया जाएगा और कूड़े का निस्तारण वहां शुरू हो जाएगा।
प्रशांत कुमार भारती, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका।