आजमगढ़। जिला महिला अस्पताल में चिकित्सक तो चिकित्सक आशा बहुएं भी मोटे कमीशन की लालच में मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कराती हैं। शाम होते ही जिला महिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पतालों के दलाल सक्रिय हो जाते हैं। जो आशा बहुओं से मिलकर मरीजों को रेफर कराकर प्राइवेट अस्पतालों तक पहुंचाते हैं।
जिला महिला अस्पताल में लोग अच्छे और नि:श़ुल्क इलाज की आशा में आते हैं। लेकिन यहां आने पर अस्पताल के चिकित्सकों, स्टाफ नर्सों, वार्ड ब्वाय आदि के द्वारा इनका इतना शोषण किया जाता है कि इन लोगों के सारे सपने धूल धूसरित हो जाते हैं। महिला अस्पताल में अगर कोई दिन में मरीज लेकर पहुंचता है तो चिकित्सक भले मिल जाएं लेकिन रात के समय यहां आने वाले मरीजों को सुबह तक चिकित्सक के आने का इंतजार करना पड़ता है। नहीं तो मरीजों के परिजन चिकित्सक के आवास पर जाकर अपने मरीज को देखने की अनुनय विनय करके देखने के लिए राजी करते हैं। शाम होते ही जिला महिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पतालों के दलाल सक्रिय हो जाते हैं। जो मरीज लेकर आने वाली आशा बहुओं से बात कर मरीज को प्राइवेट अस्पताल में ले जाने के लिए राजी करते हैं। आशा बहू को इस कार्य के लिए पांच हजार रुपये प्राइवेट अस्पताल की ओर से दिए जाते हैं। जबकि अगर आशा बहू किसी गर्भवती महिला की डिलीवरी सरकारी अस्पताल में कराती है तो उसे तीन सौ रुपये कमीशन मिलता है। इसलिए ज्यादा पैसे की लालच में आशा बहुएं मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों तक ले जाती हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय की मुख्य अधीक्षिका डा. अमिता अग्रवाल का कहना है कि मुझे इसकी जानकारी है कि आशा बहुओं को प्राइवेट अस्पतालों द्वारा एक मरीज का पांच हजार रुपये कमीशन दिया जाता है। लेकिन सबकुछ जानने के बाद भी हम कुछ नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास कोई शिकायत इस बारे में नहीं आई।