आजमगढ़। जिले में लोगों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अपनों पर प्यार लुटाने का अनोखा उदाहरण पेश किया है। बड़ी संख्या में लोगों ने जमीन-जायदाद दानपत्र के जरिए अपने परिवारजनों के नाम कर दी। आंकड़ों के अनुसार, जिले में 5088 लोगों ने दानपत्र से संपत्ति हस्तांतरित की। इससे सरकार को 15.67 करोड़ रुपये की आय हुई।
वित्तीय वर्ष के अंतिम माह मार्च में रजिस्ट्री कार्यालयों में खासा उत्साह देखने को मिला। इस दौरान निबंधन विभाग ने अकेले मार्च में ही करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित किया। अधिकारियों का कहना है कि लोग समय रहते अपनी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराने के प्रति जागरूक हुए हैं। पूरे जिले में इस वित्तीय वर्ष के दौरान सिर्फ दानपत्र के जरिए जमीन-जायदाद देने वालों से 15 करोड़ 67 लाख का राजस्व सरकारी खजाने में जमा हुआ।
राजस्व संग्रह के मामले में जिले की सभी तहसीलों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इसमें सगड़ी तहसील ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दान पत्र के जरिए तीन करोड़ 38 लाख 93 हजार रुपये का राजस्व जुटाया। दूसरे स्थान पर सदर तहसील रही।
यहां दानपत्र के जरिए तीन करोड़ पांच लाख 70 हजार रुपये का राजस्व आया। सबसे कम एक करोड़ 17 लाख का राजस्व दानपत्र के जरिए मेंहनगर तहसील में आया। दूसरे स्थान पर मार्टीनगंज का निबंधन कार्यालय रहा। यहां दानपत्र के जरिए एक करोड़ 70 का राजस्व आया। दानपत्र पर दी गई छूट से न केवल लोगों को आर्थिक राहत मिली है, बल्कि इससे परिवारों के बीच संपत्ति विवाद कम होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।