आजमगढ़। महामारी के इस दौर में भी लोग हेराफेरी से करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसका खुलासा बुधवार को 45 अधिकारियों द्वारा एक साथ किए गए मनरेगा कार्यों के निरीक्षण में हुआ। सीडीओ ने एक गांव में दर्ज मजदूरों से कम संख्या पकड़ी। इसके लिए उन्होंने ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया।
शासन के निर्देश पर जनपद में मनरेगा का कार्य कराया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मनरेगा कार्ड धारकों और प्रवासी श्रमिकों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत जनपद के लगभग 400 से अधिक गांवों में मनरेगा का कार्य संचालित हो रहा है। इन कार्यों की हकीकत का जायजा लेने के लिए सीडीओ ने 45 अधिकारियों को तैनात कर निरीक्षण करने का निर्देश दिया। जिसमें 22 बीडीओ, 22 एपीओ और खुद सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला शामिल रहे। सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला ने बताया कि निरीक्षण के दौरान वह गौसपुर गांव में पहुंचे। जहां उन्होंने गांव में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने उपस्थिति पंजिका देखी तो उसमें 37 मजदूर पंजीकृत थे लेकिन जब उन्होंने मजदूरों की गिनती कराई तो 35 मजदूर ही कार्य करते हुए पाए गए। इसे उन्होंने गंभीरता से लेते हुए वहां मौजूद ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवक को फटकार लगाई। साथ ही सभी को शोकाज नोटिस जारी कर एक सप्ताह में स्पष्टीकरण तलब किया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनके द्वारा संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।