अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल स्कूलों में नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्त प्रधानाध्यापकों और लिपिकों पर कार्रवाई की तैयारी है। जांच प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इससे ऐसे लिपिकों और प्रधानाध्यापकों में खलबली है।
अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष 2014 के बाद प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और लिपिकों के 106 पदों पर नियुक्ति हुई थी। प्रधानाध्यापक पद पर 17, सहायक अध्यापक पद पर 74 और लिपिक पद पर 17 लोगों की नियुक्त की गई थी। इन नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा विभाग और मैनेजमेंट के बीच जमकर खेल हुआ। नियमों को ताक पर रख कर कई नियुक्तियां कर दी गई। दिसंबर 2017 के अंत में जिलाधिकारी और कमिश्नर के यहां शिकायत की गई कि बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन पटल सहायक राम बचन यादव की ओर से रुपये लेकर लिपिकों की नियुक्तियां की गईं हैं, जबकि शासन से उस दौरान लिपिकों की नियुक्ति पर रोक थी। तब जिलाधिकारी ने राम बचन यादव को शिकायत प्रकोष्ठ से अटैच करते हुए मामले में जांच के लिए सीडीओ अभिषेक सिंह, बीएसए डॉ. वीके शर्मा और अपर सांख्यकी अधिकारी सुनील की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने मामले की जांच शुरू की प्रधानाध्यापकों और लिपिकों की नियुक्ति में काफी अनियमितता मिलने लगी। इसके बाद कमेटी की ओर से सभी पदों की जांच शुरू कर दी गई। तीन सदस्यीय कमेटी की जांच अब अंतिम दौर में है। इसमें कई का बाहर होना तय है।
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अशासकीय सहायता प्राप्त जूहा स्कूलों में लिपिकों और प्रधानाध्यापकों की जांच अंतिम दौर में है। जल्द ही मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी। कई लोगों की नियुक्तियों में मानकों और नियमों की अनदेखी की गई है।
डॉ. वीके शर्मा, जिलाधिकारी