आजमगढ़। आगरा विवि से वर्ष 2004-05 में जारी फर्जी डिग्री मामले में एडी बेसिक ने मंडल के सचिव बेसिक और सभी बीएसए संशोधित जांच रिपोर्ट भेजते हुए अब इसके आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नई रिपोर्ट में अब मंडल के 12 शिक्षकों की डिग्री को फर्जी और टैंपर्ड बताया गया है। साथ ही एक एक शिक्षक को संदिग्ध की श्रेणी में रखा गया है। अमर उजाला ने एडी बेसिक की ओर से गलत जांच रिपोर्ट कर कई सही शिक्षकों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का मुद्दा प्रमुखता के साथ उठाया था। एडी बेसिक योगेंद्र कुमार की ओर से 10 नवंबर को सचिव और सभी बीएसए को भेजी जांच रिपोर्ट में मंडल के 29 शिक्षकों को फर्जी डिग्रियों की 3517 की सूची में बताते हुए सभी की सेवा समाप्ति और विविध कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। डिग्री सही होने के बाद भी फंसे शिक्षकों ने भी एडी बेसिक के आदेश के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। एडी बेसिक ने संशोधित जांच रिपोर्ट सचिव को भेजने के साथ ही सभी बीएसए को भी जारी क ी है। नई रिपोर्ट में आजमगढ़ के तीन शिक्षकों की डिग्री को 3517 की फर्जी सूची में बताया गया है। इसमें नम्रता यादव, दीपक कुमार गुप्ता और नीलम यादव शामिल हैं। एक शिक्षक रितेश कुमार को टेंपर्ड (1053) की सूची में बताया। साथ ही एक मोनिका सिंह को भी की भी डिग्री को फर्जी बताया गया है, लेकिन उनके पिता के नाम में अंतर होने के कारण इसे संदिग्ध की सूची में रखा गया है। बलिया में सिर्फ एक शिक्षक विनेश की डिग्री को अब फर्जी बताया गया है। पांच शिक्षक मुकेश कुमार, सतीश कुमार, विवेक कुमार, विनोद कुमार, कालीचरन की डिग्री को टैंपर्ड बताया गया है। मऊ के दो शिक्षकों राजकुमार और राजे श्री को पहले की तरह ही फर्जी की सूची में रखा गया है। सभी बीएसओ को अब नई रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई को कहा गया है।
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एडी बेसिक की ओर से जारी की गई संशोधित जांच रिपोर्ट मिली है। अब इसके आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
डॉ. वीके शर्मा, प्रभारी बीएसए
जांच रिपोर्ट 10 नवंबर को संशोधित एक नवंबर को
आजमगढ़। सरकारी कार्यालयों में किस आधार पर कार्य किया जा रहा है, इसका एक नजारा एडी बेसिक कार्यालय में भी दखने को मिला है। एडी बेसिक कार्यालय से 10 नवंबर को 3525-28 डिस्पैच नंबर पर जारी जिस जलत रिपोर्ट को लेकर बवेला मचा था, अब उसका संशोधन एक नवंबर की तारीख में किया गया है। ये रिपोर्ट एक नंबर को जारी हुई है, लेकिन डिस्पैच संख्या 3780-33 है। यदि संशोधन एक नवंबर को है तो
डिस्पैच संख्या भी पहले से कम होनी चाहिए थी।
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कार्रवाई पर सभी ने साधी चुप्पी
आजमगढ़। गलत जांच रिपोर्ट कई दिनों तक अखबारों की सुर्खियां बनी। फंसे शिक्षकों ने भी जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक गुहार लगाई। सभी खामियों से उन्हें अवगत भी कराया, लेकिन उच्च अधिकारी मामले में कार्रवाई के बजाय उनके बचाव में जुटे हैं। यहां तक कि एडी बेसिक के खिलाफ सुनना भी पसंद नहीं कर रहे हैं।
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संशोधित रिपोर्ट जारी की गई है। ये कब जारी हुआ था और इसमें कितने शिक्षक शामिल है इसके बारे में कार्यालय में देखकर ही बता सकता हूं।
योगेंद्र कुमार, एडी बेसिक