आजमगढ़। हत्या के एक मामले की सुनवाई पूरी होने पर अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात ने हत्या के मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास और 52 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं इसी मामले में उन्होंने एक आरोपी को कातिलाना हमले का दोषी पाते हुए 10 वर्ष का कारावास और 22 हजार जुर्माना लगाया। जबकि आठ आरोपियों को दो-दो वर्ष की कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
बताते चलें कि जहानागंज थाना क्षेत्र के महुआ मुरारपुर गांव में रामसरीख यादव और बिहारी यादव के बीच काफी दिनों से जमीनी विवाद चल रहा था। इसी रंजिश को लेकर 26 मार्च 2002 की रात बिहारी पुत्र रग्घु यादव, रामअवध पुत्र सुमेर, सरीख पुत्र बालचंद, सुदर्शन पुत्र सीता, बृजभान पुत्र शंकर, रामअवतार पुत्र भोला, धर्मेंद्र पुत्र शिवकुमार, अनिल पुत्र बालचंद, गोविंद पुत्र निन्हकू, आकेंद्र उर्फ अरविंद पुत्र बिहारी और रामविनय पुत्र बालचंद लाइसेंसी बंदूक, कट्टे और लाठी डंडे से लैस होकर रामसरीख यादव के दरवाजे पर पहुंचे। जहां आकेंद्र ने रामसरीख की बहू पूनम पत्नी गोरख और रामविनय ने सोनिया पत्नी रामसरीख को गोली मार दी। इस घटना में पूनम की मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में एडीजीसी सोरख यादव और राममिलन यादव ने वादी रामसरीख सहित नौ गवाह पेश किए। मुकदमें के दौरान आरोपी सरीख की मौत हो गई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश कोट नंबर सात ने आरोपी आकेंद्र उर्फ अरविंद को आजीवन कारावास और 52 हजार रुपये जुर्माना, रामविनय को कातिलाना हमले के आरोप में 10 वर्ष का कारावास और 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं अन्य आरोपियों को दो-दो वर्ष की कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।