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किसी को लगा झटका तो किसी की खिली बांछे

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आजमगढ़। आरक्षण की सूची जारी होते ही कइयों के आशाओं पर पानी फिर गया तो कइयों को मुंह मांगी मुराद मिल गई। इस आरक्षण सूची ने कई दिग्गजों को पत्नी या मां की आड़ ताल ठोकने को विवश कर दिया है। वहीं कई लोग अपने दूसरे प्रत्याशी को समर्थन देकर उसके पीछे से अपनी रणनीति बनाने लगे हैं।
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शासन द्वारा नगर निकाय चुनाव के तहत नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए आरक्षण की सूची जारी कर दी गई है। हालांकि अभी 20 अक्टूबर तक आपत्तियां दाखिल की जा सकती है। लेकिन सूची को लेकर हलचल तेज हो गई है। विगत कई महीनों से हजारों लाखों रुपये खर्च कर संभावित प्रत्याशियों ने बड़े-बड़े होडिंग्स और बैनर लगाकर लोगों को शुभकामना संदेश दिए। लेकिन आरक्षण सूची ने उन्हें जोर का झटका दिया है। लालगंज नगरपंचायत पिछले चुनाव में पिछड़ी महिला के लिए आरक्षित थी, लेकिन इस सीट को अबकी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने से कइयों के अरमानों पर पानी फिर गया। सरायमीर नगर पंचायत सीट पिछले चुनाव में पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी लेकिन इस बार इस सीट को सामान्य महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। आजमगढ़ नगरपालिका के पहले से ही सामान्य सीट की उम्मीद थी। सीट सामान्य होने से प्रत्याशियों की बाछें खिल गई है। लेकिन सबसे ज्यादा धक्का मुबारकपुर नगरपालिका सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों को लगा है। क्योंकि मुबारकपुर नगरपालिका सीट पिछले चुनाव में पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित थी। इस सीट पर डा. शमीम का कई वर्षों से कब्जा है। लेकिन इस बार इस सीट को पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जिसके कारण अब उन्हें किसी महिला को मैदान में उतारकर पर्दे के पीछे से ताल ठोकना होगा। वहीं कई सीटें ऐसी भी हैं जिनका आरक्षण बदलने से कई प्रत्याशी अपने समर्थन में दूसरे प्रत्याशी को उतारकर पर्दे के पीछे से रणनीति सेट करने की तैयारी में हैं।
वैसे जो भी हो वर्तमान में सबसे ज्यादा संभावित उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन इन संभावित प्रत्याशियों द्वारा धड़ल्ले से पार्टी के निशान और पार्टी के नेताओं की छवि का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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