आजमगढ़। शासन की लाख सख्ती के बाद भी प्रधानमंत्री आवासों और मनरेगा के कार्यों में सेक्रेटरी फर्जीवाड़ा करने से नहीं चूक रहे हैं। अब पवई ब्लाक के समैसा गांव में सेक्रेटरी की ओर से प्रधानमंत्री आवास के लिए न सिर्फ चार अपात्रों का रजिस्ट्रेशन कराया गया, बल्कि आवास के लिए 4.80 लाख रुपये भी स्वीकृत करा दिए गए। प्रधान की शिकायत पर हुई जांच में मामले की पोल खुली तो परियोजना निदेशक ने सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।
पवई ब्लॉक के गांव समैसा में गांव की प्रधान कुमारी ने 18 जुलाई को परियोजना निदेशक से शिकायत की कि गांव के सेक्रेटरी पतिराम ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सतीश पुत्र राजाराम, कालिका पुत्र रामसूरत, दयाराम पुत्र सिंधू और दयाशंकर पुत्र सिंधू का चयन कर लिया। इनका न सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराया गया था, बल्कि जीयो टैगिंग के बाद आवासों के लिए चार लाख 80 रुपये की धन भी स्वीकृत करा लिया गया था। शिकायत की जांच के लिए परियोजना निदेशक देवदत्त शुक्ला की ओर से पवई ब्लाक के बीडीओ लालजी को अधिकृत किया गया। बीडीओ की जांच में भी चारों अपात्र पाए गए। रिपोर्ट मिलने के बाद पीडी ने बीडीओ को आरोपी सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।
जांच में देरी पर बीडीओ को कारण बताओ नोटिस
आजमगढ़। पवई ब्लाक के गांव समैसा में सेक्रेटरी की जांच बीडीओ लालजी को सौंपी गई थी। लेकिन उनकी ओर से निर्धारित समय में जांच आख्या प्रस्तुत नहीं की गई। जांच में देरी पर परियोजना निदेशक की ओर से बीडीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
शिकायत पर मामले की जांच बीडीओ पवई को सौंपी गई थी। जांच में अपात्रों के चयन की पुष्टि हुई है। मामले में सेक्रेटरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जांच आख्या देने में देरी पर बीडीओ से भी जवाब तलब किया गया है।
देवदत्त शुक्ला, परियोजना निदेशक