लाटघाट। प्रशासन कितना भी दावा करे कि उसकी तैयारियां पूरी हैं और नदी के लाल निशान को छूते ही बाढ़ चौकियां एक्टिव हो जाएंगी, लेकिन महुला गढ़वल बांध पर इसका कोई असर नहीं देखने को मिल रहा है। डिघिया गेज पर चार दिनों के अंदर दूसरी बार नदी का जलस्तर लाल निशान से ऊपर है, लेकिन अभी तक बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों का पता नहीं है।
घाघरा नदी का जलस्तर शुक्रवार की शाम चार बजे बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 71.65 मीटर और डिघिया गेेज पर 70.72 मीटर दर्ज किया गया। जबकि गुरुवार की शाम चार बजे बदरहुंआ गेज पर 71.55 मीटर और डिघिया गेज पर 70.66 मीटर था। नदी बदरहुंआ गेज पर खतरा बिंदू 71.68 मीटर से तीन सेमी नीचे तो डिघिया गेज पर खतरा बिंदू 70.40 मीटर से 32 सेमी ऊपर बह रही है।
जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटान भी तेज हो गई है। नदी घटने के बाद एक बार फिर डिघिया गेज पर खतरा बिंदू से ऊपर है लेकिन शुक्रवार को बाढ़ चौकियां बंद मिली। कोई भी कर्मचारी वहां पर नजर नहीं आया। जबकि प्रशासन द्वारा महुला, हाजीपुर, जमुवारी, इस्माइलपुर, हैदराबाद, कुड़ही, सहदेवगंज, शिवपुर और औघड़गंज में 10 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। शुक्रवार को महुला और हाजीपुर में बनाई गई बाढ़ चौकियों पर पशु चिकित्सक तो मिले लेकिन अन्य कोई भी कर्मचारी नजर नहीं आया।
जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे
लाटघाट। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के गांवों में जाने वाले मार्गों पर पानी चढ़ आया है। ग्रामीण पानी में घुसकर आवागमन करने को मजबूर हैं। वहीं स्कूली बच्चे खरैलिया ढा़ला से सोनौरा आने के लिए चह के सहारे पानी में घुसकर आवागमन कर रहे हैं। पानी से करीब दो दर्जन गांव घिर चुके हैं। देवारा खास राजा गांव के 28 पुरवे, शाहडीह, सोनौरा, बांका, बूढ़नपट्टी, अजगरा, मगर्वी आदि गांव को बाढ़ के पानी ने घेर रखा है। जिसके कारण अब उन्हें जानवरों का चारा जुटाना भी भारी पड़ रहा है।