लाटघाट। शारदा, गिरजा और सरयू बैराज से बुधवार को सरयू नदी में 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जलस्तर और बहाव तेज हो गया है। बीते 48 घंटे में कुल 5.27 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से सगड़ी तहसील के देवारा क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ और कटान का खतरा गहरा गया है। तेज बहाव के कारण सहबदिया गांव में कटान रोकने के लिए लगाए गए करीब 150 मीटर परखूपाइन नदी में बह गए, जबकि किसानों की लगभग 10 बिस्वा उपजाऊ भूमि भी कटकर नदी में समा गई।
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सरयू नदी के बढ़ते बहाव से बाढ़ खंड की ओर से करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे कटानरोधी कार्यों पर भी संकट खड़ा हो गया है। बीते 24 घंटों में ही 80 परखूपाइन नदी की तेज धारा में बह गए। सहबदिया गांव में गया के खेत के सामने लगाए गए आठ सीमेंट के परखूपाइन बह गए। वहीं, छागुर और जय सिंह के खेत के सामने लगे करीब 60 परखूपाइन भी नदी में समा गए। वहीं, जगदीश, रामपति और रामदरस के खेतों के सामने लगाए गए 25 परखूपाइन भी तेज बहाव की भेंट चढ़ गए।
कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से परखूपाइन और गैबियन लगाए जा रहे हैं। नदी की तेज धारा के सामने ये प्रयास असरदार साबित नहीं हो रहा है। बाढ़ खंड के जेई रामानंद ने बताया कि गैबियन डालकर कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन तेज बहाव के कारण वे बैठ जा रहे हैं। इससे काम प्रभावित हो रहा है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान से तटवर्ती गांवों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो कृषि भूमि के साथ-साथ आबादी पर भी खतरा मंडरा सकता है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हैं, जबकि बाढ़ खंड की टीमें कटान प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
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48 घंटे में 5.27 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सरयू का जलस्तर बढ़ा
विभिन्न बैराजों से बीते 48 घंटे में सरयू नदी में 5.27 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। मंगलवार को 2.53 लाख क्यूसेक और बुधवार को 2.73 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। बदरहुआ नाले पर मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 70.04 मीटर दर्ज किया गया था, जो बुधवार को 46 सेंटीमीटर बढ़कर 70.50 मीटर पहुंच गया। यहां खतरे का निशान 71.68 मीटर है। वहीं, डिघिया नाले पर जलस्तर 69.37 मीटर से बढ़कर 69.77 मीटर हो गया, जो 40 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्शाता है। यहां खतरे का बिंदु 70.40 मीटर है। प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है।