आजमगढ़। शासन के निर्देश पर जनपद में चलाए जा रहे एंटी भूमाफिया ओर अतिक्रमणकारियों के चिह्नांकन से अवैध कब्जेधारियों में हड़कंप मच गया है। अभियान के दौरान जनपद का एक महाविद्यालय भी इसकी जद में आ गया। जिसे प्रबंधक द्वारा अभिलेखों में हेराफेरी कर महाविद्यालय का निर्माण कराया गया था। जांच के दौरान प्रकरण खुलने पर जिलाधिकारी ने प्रबंधक के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
जिलाधिकरी चंद्र भूषण सिंह ने बताया है कि शासन के निर्देशानुसार एंटी भू माफियाओं और अतिक्रमणियों का चिन्हांकन करके भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी है। पूर्व 25 अतिक्रमणकारियों और अवैध कब्जेदारों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज हो चुका है। इनके अलावा 33 अन्य के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के निर्देेश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि बूढ़नपुर तहसील के गहजी गांव में स्थित मां शारदा महाविद्यालय शंभूपुर गहजी के संस्थापक फौजदार पुत्र शिवप्रसाद की ओर से बंजर और जंगल की भूमि को अभिलेखों में हेराफेरी कर अपने नाम से दर्ज करा ली गई। उन्होंने उक्त जमीन की 4.551 एकड़ भूमि पर कब्जा कर महाविद्यालय की बिल्डिंग का निर्माण करा लिया गया था। उक्त भूखण्ड के विधिवत अभिलेखीय परीक्षण और जांचोपरांत चकबन्दी अधिकारी फूलपुर के द्वारा बंजर और जंगल की जमीन से फौजदार सिंह का नाम निरस्त कर गांवसभा के बंजर और जंगल के खाते में अंकित कर दिया गया है। चकबंदी अधिकारी/बंदोबस्त अधिकारी पीके राय ने फौजदार सिंह के विरुद्घ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा के तहत अभियोग पंजीकृत किए जाने की संस्तुति की।
इसी तरह से मेंहनगर तहसील के मंगरांवा में भूखंड संख्या 1632 और 1635 ताल की जमीन पर अभिलेखों में हेराफेरी कर 32 लोगों ने नाम दर्ज करा लिया था। इनके द्वारा कुल 23.977 एकड़ जमीन पर कब्जा जमाया गया था।चकबंदी अधिकारी ने इसे निरस्त कर गांवसभा के ताल खाते में अंकित कर दिया। दोोनों मामलों में जिलाधिकारी ने संस्थापक के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया है।