आजमगढ़। जिले के दो ब्लाक ऐसे हैं जहां कानूनी शिकंजे में फंसने के कारण ब्लाक प्रमुखों को अभी तक शपथ नहीं दिलाई जा सकी है। जहानागंज के ब्लाक प्रमुख संजय यादव अपहरण के मामले में जेल में हैं, तो मार्टीनगंज के ब्लाक प्रमुख मनोज सिंह के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी है।
दोनों ही ब्लॉकों में राज्य वित्त के तहत विकास के लिए अभी तक 113 लाख रुपये जा चुके हैं, लेकिन इसमें से एक भी रुपया खर्च नहीं हो सका है। इसी तरह दोनों वर्षों में बिलरियागंज में भी 77 लाख रुपये भेजे गए, लेकिन विकास कार्य कोई नहीं हुए।
और तो और बोर्ड के गठन के इतना समय के बाद भी पंचायती राज विभाग की ओर से आज तक ब्लाक के खाते के संचालन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। मामले की फाइल डीएम की ओर से तलब की गई है।
जहानागंज के ब्लॉक प्रमुख संजय यादव ने जेल से ही चुनाव लड़ा था। वो 2014 से ही अपहरण के मामले में जेल में बंद हैं। चुनाव जीत के ब्लॉक प्रमुख तो बन गए, लेकिन आज तक शपथ नहीं ले पाए। ब्लाक के खाते में वर्ष 2016-17 में 39.28 लाख और 2017-18 में 17.76 लाख रुपये जा चुके हैं।
पहले के भी खाते में 42.41 लाख पड़े हैं। लेकिन ब्लाक प्रमुख के जेल में होने के कारण एक भी रुपये का प्रयोग आज तक नहीं किया जा सका है। नतीजन ये रुपये अभी तक खाते में पड़े हैं। ऐसे में लगभग 82 गांवों का विकास ठप पड़ा है।
कमोबेश यही स्थिति मार्टीनगंज की है। ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव के बाद यहां प्रमुख की कुर्सी पर स्व. सौरभ सिंह सोनू आसीन हुए थे। अभी वो बोर्ड की एक ही बैठक ले पाए थे। तब तक विकास के लिए कोई पैसा खर्च नही किया जा सका था।
नवंबर 2016 में बलिया में हुए एक हादसे में इनकी मौत हो गई और प्रमुख की कुर्सी खाली हो गई। अगस्त 2017 में आयोग के निर्देश के बाद यहा उपचुनाव हुआ। स्व. सौरभ सिंह के भाई गौरव सिंह को चुनाव में हराकर मनोज सिंह प्रमुख बने, लेकिन कानूनी शिकंजे के कारण वो भी इस कुर्सी पर आज तक नहीं बैठ पाए हैं।
धोखाधड़ी के मामले में उनके खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी है। दो बार उनके शपथ ग्रहण का कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है, लेकिन पुलिस उन्हे गिरफ्तार करने के लिए तैयार बैठी है। नतीजन वो शपथ लेने के लिए ही नहीं आ रहे हैं। इस ब्लाक में भी राज्य वित्त के तहत वर्ष 2016-17 में 38.94 लाख और 2017-18 में 17.61 लाख रुपये खाते में जारी हो चुके हैं।
इसके अलावा 41.07 लाख पहले के खाते में बचे हैं। लेकिन कोई उपभोग करने वाला नहीं है। वहीं, बिलरियागंज में भी विकास के लिए वर्ष 2016-17 में 53.38 लाख और 2017-18 24.14 लाख रुपये भेजे गए हैं, लेकिन विकास के नाम पर एक भी रुपया आज तक खर्च नहीं किया जा सका है।
विकास कार्य शुरू न होने की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच मामले में जिलाधिकारी ने अब सख्त रुख अपनाया है। मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से दोनों ब्लाकों को भेजी जाने वाली धनराशि के बारे में जानकारी तलब की गई है। साथ ही पंचायती राज विभाग से खाता संचालन के लिए अभी कोई उपाय न करने के बारे में भी जवाब तलब किया गया है।
ब्लाक में कई विकास कार्य चल रहे हैं। अभी काम पूरा नहीं होने के कारण भुगतान नहीं किया गया है। इससे धनराशि खाते में ही पड़ी है। गुलाबचंद, बीडीओ बिलरियागंज